भोपाल।स्टेशन बजरिया स्थित श्री महावीर जिनालय में दस लक्षण पर्व के सातवें दिन बुधवार को धर्मसभा में मनोज शास्त्री ने कहा कि इच्छाओं का निरोध करना ही वास्तविक तप है। तप की उपमा दहकती भट्ठी से दी जाती है, जिसमें कर्म रूपी ईंधन जलकर आत्मा निर्मल होती है। भोजन न लेना, मौन रहना या नीरस भोजन करना ही तप नहीं, बल्कि इच्छाओं का त्याग ही सच्चा तप है। शारीरिक तप तब तक अपूर्ण है जब तक वह मानसिक तप से न जुड़ जाए। जैसे दूध से घी पाने के लिए उसे तपाना पड़ता है, वैसे ही आत्मा की पवित्रता तप से प्रकट होती है। अध्यक्ष राजीव पंचरत्न, प्रवक्ता नरेंद्र जैन और बबीता पंचरत्न द्वारा बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए।
