
रायसेन।रायसेन कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर में मंगलवार दोपहर लंच के बाद दलित किसान कल्ला रजक अपनी मूंग की फसल का भुगतान नहीं मिलने से आहत होकर पेड़ पर चढ़ गया।देवरी तहसील के केकड़ा निवासी दलित किसान कल्ला रजक ने रस्सी लेकर और गमछा कंधे पर डालकर आत्महत्या की चेतावनी दी ।और कुछ देर तक पेड़ से लिपटकर बैठा रहा। यह घटनाक्रम देखकर मौके पर भीड़ जुट गई। बाद में प्रशासन ने के कुछ प्रशासनिक आला अफसरों की समझाइश देकर किसान को सुरक्षित नीचे उतारा।तब कहीं जाकर जिम्मेदार अधिकारियों ने ली राहत की सांस।यहवजिले की बरेली उदयपुरा विस क्षेत्रवका मामला है।जहां से केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का विदिशा रायसेन लोकसभा क्षेत्र और प्रदेश सरकार के लोक स्वास्थ्य चिकित्सा राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का गृह जिला और डॉ मोहन सरकार मे और केंद्र की मोदी सरकार में नेतृत्व करते हैं। उनके क्षेत्र में किसानों के बुरे हाल है तो देश-प्रदेश के जिलों के किसानों की क्या दुर्दशा हो रही होगी इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
यह है पूरा मामला..…किसान को गुमराह कर रहे थे जिम्मेदार अधिकारी
40 क्विंटल मूंग की तुलाई के बाद भी नहीं मिला भुगतान….
जिले की देवरी तहसील के केकड़ा गांव के किसान गल्ला रज ने बताया कि उसने करीब 40 क्विंटल मूंग सरकारी मूंग खरीदी केंद्र पर समर्थन मूल्य पर बेची थी।जिसकी तुलाई हो चुकी है। उसे करीब सवा 3 लाख रुपये का भुगतान होना है।लेकिन कई माह बीतने के बावजूद उसे भुगतान नहीं मिला।जिससे वह काफी परेशान था।कर्जदार उसे परेशान करने उसके घर पहुँचनेलगे।तो परेशान किसान ने इन्हीं सब कारणों की वजह से आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की। लेकिन प्रासंगिक अधिकारियों की समझाइश फेल हो गई।
पीड़ित किसान ने मीडियाकर्मियों को बताया कि उसकी तरह 10 अन्य किसान भी हैं, जिनके भुगतान लंबित हैं। आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव में वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया था।वह राशि भुगतान कराए जाने दर- दर भटक रहे हैं। लेकिन कहीं भी परेशान किसानों की कोई सुनवाई नहीं कर रहा है ।वही प्रशासनिक अधिकारी 90% मूंग का भुगतान करने का दावा कर रहे हैं। जबकि उनका दावा धरातल पर खोखला साबित हो रहा है। इससे ऐसा लगता है कि वह प्रशासनिक अधिकारियों को नीचे के अधिकारी सही जानकारी नहीं देते और बल्कि गलत आंकड़े देकर उन्हें गुमराह करते रहते हैं।
कलेक्टर लौटे, अधिकारियों को लगाई फटकार….
घटनाक्रम के दौरान कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा दोपहर के वक्त बंगले पर लंच कर रहे थे। जानकारी मिलते ही वे तुरंत मौके पर लौटे और जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। वहीं, जिला पंचायत सीईओ अंजू पवन भदौरिया ,एसडीएम मनीष शर्मा भी मौके पर पहुंचे और किसान को समझाने की कोशिश की। मौके पर बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग एकत्रित हो गए।पीड़ित किसान मूंग की राशि भुगतान समय से भुगतान नहीं होने से काफी तनाव में था। अगर अधिकारी समय पर नहीं पहुंचते तो वह फांसी पर झूल सकता था लेकिन कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की समझाश और सूझबूझ से काम लेने के बाद उसे नीम के पेड़ से नीचे उतारा गया ।उसके एक कंधे पर रस्सी थी तो दूसरे कंधे पर गले से एक गमछा लिपटा हुआ था ।वास्तव में वह परेशान किसान अपने इरादे में सफल हो सकता था ।लेकिन कुछ अधिकारियों की बात मानकर वह नीचे उतर आया।
काफी समझाइश के बाद नीचे उतरा किसान….
कई बार समझाने-बुझाने के बाद किसान गल्ला रज नीचे उतरने को राजी हुआ। इसके बाद कलेक्टर के गनमैन औरपुलिस कर्मियों कर्मचारियों ने पूरी सुरक्षा के साथ उसे पेड़ से नीचे उतारा। नीचे उतरने के बाद किसान को कलेक्टर के पास ले जाया गया, जहां उन्होंने उसकी बात ध्यान से सुनी।
कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने डीएमओ कल्याण सिंह ठाकुर को तत्काल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। साथ ही शेष किसानों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा करने को कहा।
अधिकारी करते हैं भोपाल से रायसेन अपडाउन एक जिम्मेदार अधिकारी नहीं रहता जिला मुख्यालय पर….
बताया जाता है कि विभिन्न सरकारी विभागों के बड़े अधिकारी जिला मुख्यालय पर निवास नहीं करते। बल्कि उनके नाम पर आवास और सरकारी बंगले एलाट भी है ।अपना अधूरा कामकाज समय पर निपटा कर वाहनों में सवार होकर भोपाल चले जाते हैं। जब इस मामले में मीडिया कर्मियों ने उनके मोबाइल फोन पर जानकारी लेना चाहिए तो उनके मोबाइल नहीं रिसीव हुए ।बल्कि मीडियाकर्मियों ने एक बार नहीं 5-6 बार फोन लगातार लगाए। लेकिन वह खामोश बने रहे ।यह हालात है ।जिला मुख्यालय के अधिकारियों के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी भी इनकी लापरवाही पर शिकंजा नहीं कसते।इसीलिए वह अपने मनमानी करते हुए दफ्तर समय पर नहीं आते हैं। और ड्यूटी करके समय से पहले कार में सवार होकर राजधानी भोपाल चले जाते हैं। क्योंकि उनका परिवार भी भोपाल में ही रहता है। मीडिया कर्मियों ने उपसंचालक कृषि विभाग केपी भगत और जिला विपणन विभाग अधिकारी डीएमओ कल्याण सिंह ठाकुर को 10 मोबाइल फोन लगाए ।लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। इस तरह अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी से जाहिर होता है कि उनको कलेक्टर का भी कोई डर और भय नहीं सताता।बेफिक्र होकर अपनी मनमर्जी में लगे रहते हैं।
