इंदौर:शनिवार की तेज बरसात ने नगर निगम के विकास कार्यों की हकीकत सामने ला दी. शहर का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया और कहीं-कहीं तीन-तीन फीट तक पानी भर गया. जिन क्षेत्रों में वर्षों से जलभराव की समस्या बनी रहती है, वहां निगम के बड़े-बड़े वादों और सुधार की बातें फिर से हवा-हवाई साबित हुईं.तेज पानी के बहाव में कई जगह दोपहिया वाहन, घरों का फर्नीचर और चार पहिया गाड़ियां बहते दिखीं.
फूटी कोठी क्षेत्र में तो कार तक पलट गई जिसमें कुछ यात्री सवार थे हालांकि स्थानीय लोगों की मदद से उसमें सवार यात्रियों की जान बच गई. जलभराव से प्रभावित क्षेत्र में फूटी कोठी, प्रजापति नगर, श्रद्धा-सबुरी नगर एमआर 9 मार्ग, रॉबर्ट चौराहा, गांधीनगर सुपर कॉरिडोर, खजराना, आजाद नगर, कबूतरखाना मिल क्षेत्र, लसूडिया मोरी, पगनिस पागा चौराहा, गौरी नगर मुसाखेड़ी रिंग रोड के दोनों तरफ बेस घने और बड़े क्षेत्र जैसे शहर के कई कॉलोनी और बस्तियां शामिल है. पानी निकासी के ठोस इंतज़ाम न होने से कॉलोनियां तालाब में तब्दील हो गईं. विकास का यह हाल देखकर भ्रष्टाचार और लापरवाही साफ झलकती है.
इनका कहना है
जब भी कोई कॉलोनी की विकसित होती है तो उसका दिशा निर्देश निगम को तैयार करना चाहिए. पानी की निकासी का बंदोबस्त नहीं है. जो सीवरेज लाइन डाली है वह छोटी है.
– लाल सिंह
मुख्य रोड से कॉलोनी के रोड मिलाते समय मापदंड में लापरवाही की जाती है. कहीं ऊंचा, कहीं नीचे जिसकी वजह से पानी की निकासी नहीं होती, नगर निगम के यह कैसे इंजीनियर हैं.
– इरफान खान
वर्तमान स्थिति में बरसात में घर से निकलना यानी मुसीबत मोल लेना है. हर तरफ जल जमाव की स्थिति बनी रहती है. विकास कार्य में करोड़ों रुपया कहां खर्च हुआ यहां बड़ा सवाल है.
– अचल सक्सेना
