सदचित आनंदस्वरूप ही भगवान जो सत्य का पक्षधर

सीहोर। ग्राम छतरपुरा में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आरंभ भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया.

श्री अयोध्यानाथ पीठाधीश्वर जगतगुरु पंडित अजय पुरोहित ने कहा कि सत चित आनंद स्वरूप ही भगवान है जो सत्य बोलते हैं. भगवान का स्वरूप सच्चिदानंद है, सत चित आनंद स्वरूप ही भगवान है, जो सत्य बोलता है. जो भगवान की छवि को अपने चित में रखता है. सत्य ही धर्म है, चित्त आनंद का अर्थ है कि सत्य ही मूल धर्म है, और चित्त का आनंद ही परम सत्य है. यहां सत्य का अर्थ केवल वचनों की सच्चाई ही नहीं, बल्कि प्रकृति के नियम और स्वभाव भी हैं. वहीं चित्त आनंद या सच्चिदानंद ब्रह्म का वह स्वरूप है, जहां अस्तित्व चेतना और परमानंद एक हो जाते हैं. इस प्रकार, सत्य और आनंद के अनुभव के माध्यम से व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप यानी ब्रह्म को पा सकता है.

कथा के पहले दिन कलश यात्रा में भाजपा के वरिष्ठ नेता मायाराम गौर, सरपंच राम सिंह जागीदार, दयाप्रसाद जागीदार और प्रीतम गौर आदि शामिल थे. ग्राम छतरपुर में भागवत कथा दोपहर बारह बजे से दोपहर तीन बजे तक की जाएगी.

 

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