
नई दिल्ली, 29 अगस्त। मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर ऊर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में कार्यकारी निदेशक के पद पर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन साल का होगा। ऊर्जित पटेल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
क्यों अहम है यह नियुक्ति?
ऊर्जित पटेल की यह नियुक्ति कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पटेल आरबीआई के गवर्नर रहते हुए नोटबंदी जैसे बड़े फैसले का हिस्सा थे। उनकी इस नियुक्ति से भारत का वैश्विक वित्तीय संस्थानों में प्रभाव बढ़ेगा। आईएमएफ में कार्यकारी निदेशक के तौर पर, पटेल भारत और बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान जैसे पड़ोसी देशों के वित्तीय मामलों का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव का लाभ इन देशों को मिलेगा।
ऊर्जित पटेल का करियर
ऊर्जित पटेल को एक अनुभवी अर्थशास्त्री और बैंकर माना जाता है। उन्होंने आरबीआई के 24वें गवर्नर के रूप में कार्य किया है। इससे पहले वे आरबीआई में डिप्टी गवर्नर के पद पर भी थे। भारतीय अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को देखते हुए, उनकी आईएमएफ में यह नियुक्ति भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को भी दर्शाता है।
