
ग्वालियर। ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के मुख्यालय पर आज दोपहर उस वक्त विचित्र स्थिति बन गई जब सैकड़ो की तादाद में जुटे मेला व्यापारियों ने ढोल ताशे बजाकर मेला प्राधिकरण के नीति नियंताओं के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। मेला व्यापारियों की नाराजगी सवासौ साल पुराने ग्वालियर मेला की दुकानों को पहली दफा ईटेंडरिंग के जरिए नीलाम करने की कवायद को लेकर थी। मेला व्यापारियों को आशंका है कि ईंटेंडरिंग की प्रक्रिया से पीढ़ी दर पीढ़ी दुकानें लगाते आ रहे पारंपरिक छोटे मझौले व्यापारियों के हाथों से मेला की दुकानें छिन जाएंगी और धन संपदा की दम पर ऊंची बोली लगाकर गरीब दुकानदारों का हक मारकर धनाढ्य लोग इन दुकानों को हासिल कर लेंगे।
मेला प्राधिकरण के दफ्तर पर आज गुरुवार सुबह से ही सैकड़ों की तादाद में मेला व्यापारी जुटने लगे थे। मेला व्यापारियों ने सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर तक प्राधिकरण के दफ्तर के बाहर ढोल, मजीरे और ताशे बजाकर ईटेंडरिंग प्रक्रिया के प्रति विरोध जताया। प्रदर्शन की समाप्ति पर मेला व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र भदकारिया, सचिव महेश मुदगल, संयुक्त अध्यक्ष एवं प्रवक्ता अनिल पुनियानी, संयोजक उमेश उप्पल, सह संयुक्त अध्यक्ष जगदीश उपाध्याय, कार्यकारी अध्यक्ष अनुज गुर्जर, कोषाध्यक्ष सुरेश हीरयानी, हरिकांत समाधिया, बब्बन सेगर आदि के नेतृत्व में मेला प्राधिकरण कार्यालय में ज्ञापन पत्र सौंपकर दुकान आवंटन की ईंटेंडरिग़ प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की। ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई है कि ईंटेंडरिंग प्रोसेस को अभी वापस नहीं लिया गया तो बहुत जल्द तीखा उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस अवसर पर मेला व्यापारियों ने मांग की कि मेला में विगत वर्ष दुकानें लगाने वाले व्यापारियों से तत्काल पैसा जमा कराकर उन्हें दुकानें आवंटित की जाएं। मेला व्यापारी संघ को ऑनलाइन प्रक्रिया पर कोई एतराज नहीं है लेकिन ईटेंडर प्रोसेस को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
मेला व्यापारी संघ के नेताओं ने मेला प्राधिकरण के अव्यावहारिक एवं असंवेदनशील निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि व्यापार मेला की 75 प्रतिशत दुकानों को ईं टेंडर के माध्यम से आवंटित किया जाना और सिर्फ 25 प्रतिशत दुकानें ही पुराने दुकानदारों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित करना कहीं से भी उचित नहीं है। हो सकता है कि मेला में पांच प्रतिशत शिकमी दुकानदार हों, अथवा वे दुकानों का गलत तरह से हेरफेर करते हों लेकिन उनके इस कृत्य की सजा सभी सौ प्रतिशत दुकानदारों को नहीं दी जा सकती है। मेला व्यापारी संघ ने चुनौती दी कि ग्वालियर मेला में यदि शिकमी या नकली दुकानदार है तो उसकी जांच कर उनके आवंटन निरस्त किए जाएं। निष्पक्ष जांच कराने का दायित्व मेला प्राधिकरण का है। व्यापारी संघ ने अपने इस मत को दोहराया कि मेला में दुकान आवंटन की वही प्रक्रिया अनवरत रखी जाए जो पिछले 119 साल से मेला में जारी है।
