
इंदौर. भविष्य के युद्ध मात्र हथियारों की लड़ाई से नहीं होंगे; बल्कि वे तकनीक, खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का मिला-जुला रूप होंगे। इससे हमारा राष्ट्र प्रौद्योगिकी, रणनीति एवं अनुकूलनशीलता के त्रिकोण में निपुण होगा और वह समृद्ध वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा. यह इतिहास से सीखने और नया इतिहास लिखने का वक्त है; यह भविष्य का अनुमान लगाने तथा उसे आकार देने का समय है.
यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही. रक्षा मंत्री डॉ. आंबेडकर नगर स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में युद्ध, संघर्ष और युद्ध लड़ने की कला पर आयोजित अपनी तरह के पहले त्रि-सेवा सम्मेलन रण संवाद को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने आधुनिक समय में युद्ध की बढ़ती जटिलताओं और अप्रत्याशितता के पीछे प्रौद्योगिकी एवं आश्चर्य के सम्मिश्रण को मुख्य कारण बताते हुए नए नवाचारों तथा अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता पर बल दिया है. उन्होंने मौजूदा प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने की भी आवश्यकता जताई है ताकि समय के साथ आगे रहते हुए चला जा सके. इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, थल सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश, विदेशी रक्षा अताशे, विद्वान एवं विचारक, शिक्षाविद तथा रक्षा उद्योग जगत से जुड़े लोग व रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और कई पूर्व सैनिक उपस्थित थे।
युद्ध अंतरिक्ष व सायबर स्पेस तक फैले
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब भूमि, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं रह गए हैं; अब वे अंतरिक्ष व साइबरस्पेस तक फैल गए हैं. उन्होंने कहा कि उपग्रह प्रणालियां, उपग्रह-रोधी हथियार और अंतरिक्ष कमान केंद्र शक्ति के नए साधन हैं. आज हमें सिर्फ रक्षात्मक तैयारी की ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय रणनीति की भी आवश्यकता है.
हथियारों के भंडार का आंकड़ा पर्याप्त नहीं
राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि अब केवल सैनिकों की संख्या या हथियारों के भंडार का आंकड़ा ही पर्याप्त नहीं है, क्योंकि साइबर युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , मानव रहित हवाई यान और उपग्रह आधारित निगरानी भी भविष्य के युद्धों को आकार दे रहे हैं. उन्होंने सटीक निर्देशित हथियारों, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और डेटा-संचालित सूचना को किसी भी युद्ध में सफलता की कुंजी बताया.
कैपेबिलिटी रोडमैप भी जारी किया
रक्षा मंत्री द्वारा प्रौद्योगिकी परिप्रेक्ष्य और कैपेबिलिटी रोडमैप भी जारी किया गया। इसमें 10 वर्ष की अवधि के लिए सशस्त्र बलों की दीर्घकालिक आधुनिकीकरण योजनाओं की रूपरेखा दी गई है, जिसमें क्षमता अंतराल को पाटने व तकनीकी रूप से उन्नत बलों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है. यह रोडमैप रक्षा उद्योग को विभिन्न क्षेत्रों में सशस्त्र बलों की भविष्य की क्षमता पूर्ति आवश्यकताओं का अवलोकन प्रदान करता है. इसका उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों को उनके नवाचार व उत्पादन प्रयासों को राष्ट्रीय रक्षा आवश्यकताओं के साथ संरेखित करने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा यह सुनिश्चित करने में मार्गदर्शन करना है कि सशस्त्र बल भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए इष्टतम रूप से संरचित और सुसज्जित हों.
