सतना :आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की रीवा शाखा की टीम ने मंगलवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचकर आवश्यक दस्तावेज जब्त किए जाने की कार्रवाई की. 6 वर्ष पहले शहर के चौराहों के सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपए के घोटाले के आरोप सामने आई थे. इस मामले में अंतिम दौर की जांच कर रही ईओडब्लू की टीम द्वारा यह कार्रवाई की गई.डिप्टी एसपी ईओडब्लू रीवा किरण किरो की अगुआई में ईओडब्लू की टीम मंगलवार को नगर निगम सतना के कार्यालय में पहुंची. जहां पर अभियंता सिद्धार्थ सिंह के चेंबर में आवश्यक दस्तावेज तलब किए गए.
ईओडब्लू की टीम की धमक को देखते हुए पहले तो ननि कार्यालय के कर्मचारियों के बीच किसी के रंगे हाथ पकड़े जाने की अफवाह फैल गई. लेकिन कुछ समय बाद ही यह स्पष्ट हो गया कि ईओडब्लू की टीम सौंदर्यीकरण घोटाले की जांच के मामले में दस्तावेज लेने के लिए पहुंची है. टीम द्वारा जब विभिन्न प्रकार के आवश्यक दस्तावेजों को तलब करना शुरु किया तो उसे उपलब्ध कराने में ननि कर्मचारियों के भी पसीने छूटने लगे. जैसे-तैसे खोजबीन कर सारे रिकार्ड सामने रख दिए गए. जिसमें से अपनी जांच के लिए आवश्यक दस्तावेजों को एकत्रित करने के बाद ईओडब्लू की टीम वापस लौट गई. ईओडब्लू की मौजूदगी के चलते कार्यालय में जो सनाका खिंचा हुआ था, टीम के वापस लौटते ही वह तनाव काफूर होता नजर आने लगा.
क्या है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार ननि द्वारा 2019 में शहर के पन्नीलाल चौक, लालता चौक, सिविल लाइन और धवारी चौराहे जैसे प्रमुख स्थानों पर सौंदर्यीकरण कराया गया था. जिसमें मूर्तियां स्थापित करने, फव्वारे लगाने और सेल्फी प्वाइंट बनाने जैसे कार्य शामिल रहे. लेकिन यह कार्य के पूरा होते ही घोटाले के आरोप सामने आने लगे. बताया गया कि जितने का काम कराया गया उसे दोगुनी राशि का भुगतान वसूला गया. मामले की शिकायत होने पर 2023 में ईओडब्लू द्वारा प्रकरण दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई. गौरतलब है कि ईओडब्लू की जांच में अब तक 25 लाख 46 हजार 414 रु की गड़बड़ी सामने आ चुकी है.
कौन-कौन हैं शामिल
ईओडब्ले द्वारा वर्ष 2023 में धारा 420 409 120बी सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरु की गई थी. इस मामले में ठेका कंपनी यूबर्ती इंजीनियर्स और मेसर्स विकास सहित अन्य लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने के साथ ही ननि के आधा दर्जन कर्मचारियों को भी लपेटे में लिया गया था. जिसमें ननि के इंजीनियर मुकेश चतुर्वेदी, रोजल सिंह, के पी शर्मा, आर पी सिंह, नागेंद्र सिंह सहित तत्कालीन सहायक आयुक्त वित्त महेश कोरी भी शामिल हैं.
