इंदौर:भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई जनहानि को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे जनस्वास्थ्य आपात स्थिति करार दिया है. कोर्ट ने स्वच्छ पेयजल को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार बताया और दोषी अधिकारियों पर सिविल व क्रिमिनल कार्रवाई, मुआवजा और जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को भागीरथपुरा (वार्ड 11) सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में दूषित पानी की आपूर्ति से जुड़े मामलों पर एक साथ सुनवाई हुई याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगड़िया ने दलील दी कि मेयर इन काउंसिल ने वर्ष 2022 में नई पेयजल पाइपलाइन बिछाने का निर्णय लिया था, लेकिन नगर निगम के दोषी अधिकारियों द्वारा फंड जारी नहीं करने से काम अटका रहा.
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2017-18 में इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए 60 जल नमूनों में से 59 पेय योग्य नहीं पाए गए थे, इसके बावजूद कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया. हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी खर्च पर टैंकर या पैकेज्ड पानी से तत्काल सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति की जाए, दूषित जल स्रोतों को बंद किया जाए, स्वास्थ्य शिविर लगें और सरकारी व सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए. साथ ही एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब से जल गुणवत्ता जांच, पाइपलाइनों की मरम्मत, क्लोरीनेशन और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के भी आदेश दिए.
