
मंडला। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए तीन माह बीतने के बाद भी जिले के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को निशुल्क यूनिफॉर्म का लाभ नहीं मिल पाया है। कक्षा पहली से आठवीं तक के करीब 95 हजार से अधिक बच्चों को गणवेश वितरण योजना के तहत दो जोड़ी यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन विभागीय कार्यवाही में देरी से अभी तक बच्चे पुरानी यूनिफॉर्म या सिविल कपड़ों में स्कूल जाने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए अब सीधे पालकों के खातों में राशि भेजी जानी है। इसके लिए कक्षावार छात्रों का सत्यापन किया जाना आवश्यक है। जिले में लगभग 95,717 बच्चों की संख्या दर्ज है, जिनमें से 85,557 बच्चों का सत्यापन लंबित है। हालांकि 85,371 बच्चों के खातों और अन्य जानकारियों का वेरीफिकेशन कर लिया गया है, लेकिन कक्षावार अद्यतन जानकारी न होने से फाइनल सूची राज्य शिक्षा केंद्र को नहीं भेजी जा सकी है।
पिछले कई वर्षों तक यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का कार्य आजीविका समूहों के माध्यम से कराया जाता रहा है। महिला समितियों को यह काम दिए जाने पर रॉ मटेरियल क्रय कर सिलाई कराने के बजाय सीधे रेडीमेड यूनिफॉर्म खरीदने के आरोप लगते रहे। गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे। इसके बाद पिछले वर्ष से शासन ने यह व्यवस्था बदली और बच्चों के खातों में राशि सीधे जमा करने का निर्णय लिया।
योजना के तहत प्रत्येक छात्र को दो जोड़ी यूनिफॉर्म हेतु 600 रुपये की राशि खातों में जारी की जाएगी। इसके लिए राज्य शिक्षा केंद्र से वन क्लिक प्रणाली से भुगतान किया जाना है। जिले से फाइनल जानकारी भेजे जाने के बाद ही राशि जारी हो सकेगी।
बच्चों और पालकों का कहना है कि निशुल्क यूनिफॉर्म योजना का लाभ समय पर नहीं मिलने से समस्या बढ़ रही है। आधे सत्र बीत जाने के बाद यूनिफॉर्म मिलने से कोई विशेष फायदा नहीं होगा। पुराने और तंग कपड़ों में बच्चे पढ़ाई करने आ रहे हैं। कई बच्चों की यूनिफॉर्म पूरी तरह खराब हो चुकी है।
इस बीच शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि यूनिफॉर्म वितरण संबंधी जानकारी एक-दो दिन में अंतिम रूप से तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी। इसके बाद केंद्र स्तर से वन क्लिक प्रणाली से राशि बच्चों के पालकों के खातों में भेजी जाएगी।
इनका कहना है
“निशुल्क गणवेश वितरण की जानकारी अपडेट की जा रही है। एक-दो दिन में बच्चों की संख्या फाइनल कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद केंद्र से वन क्लिक प्रणाली से राशि खातों में जारी होगी।”
ए.के. विश्वकर्मा, डीपीसी मंडला
