जबलपुर: रामपुर स्थित दुर्गा नगर में बिना डिग्री के एलोपैथिक क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टर महेंद्र पांडे के मामले को मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने जनहित का मुद्दा मानकर संज्ञान में लिया है। मामले में आयोग ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक एवं सीएमएचओ से मामले की जांच कराकर, की गई कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट और प्रतिवेदन एक माह में तलब किया है।
जानकारी के अनुसार महेन्द्र पाण्डे नामक झोलाछाप डॉक्टर बगैर डिग्री के ही बिना रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस के क्लीनिक संचालित कर रहा था और अनुसूची में एचएस व एक्स प्रतिबंधित दवाएं भी मरीजों को दिया करता था। जिससे मरीजों को जान का खतरा हो सकता था। प्रशासन के गरुण दल के छापे मे अनुसूची अनुसार क्रमश: 46, 536, और 16 प्रतिबंधित दवाएँ बरामद की गई, साथ ही उसके लैटर पेड पर लिखी डिग्रियां वह एक भी पेश नहीं कर पाया।
मप्र मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी फरजाना मिर्जा ने बताया कि मामले को जनहित में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा अपनी मुख्य पीठ भोपाल में प्रकरण पर सुनवाई करते हुये, कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव कुमार टण्डन ने प्रथम दृष्टया मानव अधिकारों के हनन का मामला माना है।
