
शाजापुर। विश्वभर की करीब 13 हजार पुष्टीमार्गिय मंदिर हवेलियों में बालक रूप में विराजित ठाकुरजी की भी दिनचर्या अक्षय तृतीया से बदल गई है.अब आने वाले 59 दिनों तक सभी मंदिर हवेलियों में ठाकुरजी के लिए शीतल शृंगार, भोग और हवेली में शीतलता बनाएं रखने के प्रबंध किए जाएंगे.
सभी पुष्टीमार्गिय मंदिर हवेलियों में ठाकुरजी का मंदिर मुखिया परिवार बालक की तरह ख्याल रखता है. सुबह उठाने से लेकर रात को शयन तक दिन में पांच बार ठाकुरजी का श्रृंगार किया जाता है. प्रतिदिन और प्रत्येक श्रृंगार में ठाकुरजी की मनोहारी छवि दिखाई देती है. इसी छवि को निहारने के लिए विश्वभर के वैष्णवजन मंदिर हवेलियों में पहुंचते हैं. परंपरानुसार प्रत्येक मौसम में ठाकुरजी की दिनचर्या का बदलाव किया जाता है. ऐसे में अक्षय तृतीया से ठाकुरजी की हवेलियों में प्रवेश करते ही शीतलता का अनुभव हो रहा है. क्योंकि अक्षय तृतीया से ठाकुरजी को गर्मी से बचाने के जतन प्रारंभ हो गए हैं. ये जतन अषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा तक जारी रहेंगे.
मंदिर मुखिया परिवार ने बताया कि यहां पर अषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि तक ठाकुरजी को श्वेत, हल्के गुलाबी, हल्का पीला सहित शीतलता प्रदान करने वाले सूती वस्त्र पहनाएं जाएंगे. इसके साथ ही श्रृंगार में मोतियों की माला, शीतलता प्रदान करने वाले पुष्पों की माला का उपयोग किया जाएगा. भोग के लिए कैरी का पना, आम का रस, चने की दाल, श्रीखंड, आमखंड, दही, मक्खन, खरबूजा, खस का शर्बत आदि का उपयोग होगा. इसके अतिरिक्त मंदिर हवेलियों में व्यवस्था के अनुसार पंखे, कूलर और एसी भी ठाकुरजी के लिए सतत चालू रखे जाएंगे. वहीं कलशों में भरकर यमुनाजी का पानी रखा जाएगा और फव्वारे भी लगाए जाएंगे.
