न्यूयॉर्क, 28 अप्रैल (वार्ता) ईरान को न्यूयॉर्क में चल रहे परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन का उपाध्यक्ष चुना गया है। ईरान ने इसे परमाणु हथियार मुक्त दुनिया के लिए अपने प्रयासों की जीत बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने इस चुनाव की जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) का हालांकि कहना है कि ईरान लगातार परमाणु अप्रसार संधि के नियमों का उल्लंघन कर रहा है। वियना में ईरानी मिशन ने एक बयान में कहा कि यह चुनाव वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए ईरान की ‘भूमिका और वकालत’ का सम्मान है। ईरान ने अपना पुराना नारा दोहराते हुए कहा, “परमाणु ऊर्जा सभी के लिए, लेकिन परमाणु हथियार किसी के लिए नहीं।” ईरान ने अपने दावे में यह भी कहा कि उनके यहां परमाणु हथियारों पर धार्मिक रूप से पाबंदी है। इसके लिए उन्होंने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता के उस फतवे का हवाला दिया जिसमें इन हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। गौरतलब है कि पिछले साल आईएईए के 35 सदस्यीय बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें 2005 के बाद पहली बार आधिकारिक रूप से कहा गया था कि ईरान परमाणु नियमों का पालन नहीं कर रहा है।
परमाणु एजेंसी का आरोप है कि ईरान कई संदिग्ध ठिकानों पर अघोषित परमाणु सामग्री और गतिविधियों के बारे में जानकारी देने में जानबूझकर विफल रहा है।
इसी सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया को आगाह करते हुए कहा कि देश परमाणु हथियारों के विनाशकारी परिणामों को भूलते जा रहे हैं और दुनिया ‘भूलने की खतरनाक बीमारी’ की चपेट में है। श्री गुटरेस ने याद दिलाया कि परमाणु निरस्त्रीकरण की कोशिशें 1946 से ही शुरू हो गई थीं, लेकिन अब दशकों की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। उन्होंने कहा, “परमाणु हथियारों की धमकियां फिर से सुनाई देने लगी हैं, देशों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है और हथियार नियंत्रण की नीतियां दम तोड़ रही हैं।” महासचिव ने बताया कि पिछले साल दुनिया भर में सैन्य खर्च बढ़कर 2.7 ट्रिलियन डॉलर हो गया। इसके साथ ही दशकों बाद पहली बार परमाणु हथियारों की संख्या में भी चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु परीक्षणों को लेकर फिर से चर्चा शुरू होना और नए देशों द्वारा परमाणु हथियार पाने की कोशिश करना एक बड़ा खतरा है।
श्री गुटरेस ने स्पष्ट किया कि अतीत में दुनिया केवल इसलिए बची रही क्योंकि नेताओं ने संयम दिखाया। उन्होंने जोर देकर कहा, “परमाणु युद्ध कभी जीता नहीं जा सकता और इसे कभी लड़ा भी नहीं जाना चाहिए।” महासचिव ने एनपीटी को दुनिया की सुरक्षा की ‘बुनियाद’ बताते हुए सदस्य देशों से अपनी जिम्मेदारियों को बिना किसी शर्त के निभाने की अपील की। उन्होंने परमाणु एजेंसी की जांच व्यवस्था और परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने वाले नियमों को और कड़ा करने की जरूरत बताई। श्री गुटरेस ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकें परमाणु खतरों को और जटिल बना रही हैं। उनके अनुसार, पुरानी संधियों को आज की चुनौतियों के हिसाब से बदलने का वक्त आ गया है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में तनाव बढ़ा हुआ है, जिससे परमाणु सुरक्षा और भविष्य के नियमों पर फिर से बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

