
गुना। बमोरी विकासखंड के रामपुर टैंक एकीकृत विद्यालय में मध्यान्ह भोजन योजना की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मंगलवार को नवभारत द्वारा मिड-डे मील का काला सच उजागर करने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि जिला शिक्षा अधिकारी और बीआरसी स्तर पर ठोस कार्रवाई होगी, लेकिन दो दिन बीत जाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। गुरुवार को तो समूह संचालक की मनमानी का आलम यह रहा कि स्कूल में भोजन ही नहीं बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि 150 से अधिक बच्चे दिनभर भूखे ही रहे।
गुरुवार को बच्चों को खाना नहीं मिला
विद्यालय के प्राचार्य संजय मराठा ने बताया कि गुरुवार को मां शारदा स्व-सहायता समूह ने मिड-डे मील बनाना ही उचित नहीं समझा। इस कारण सभी बच्चों को भूखे रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है। अक्सर समूह द्वारा बेहद कम मात्रा में खाना बनाया जाता है, जिससे बच्चों को अधपेट रहना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या बालिका छात्रावास की बच्चियों को होती है, जिनकी संख्या करीब 100 है। प्राचार्य के अनुसार, उनका एक समय का भोजन विद्यालय पर ही निर्भर करता है, और जब समूह खाना नहीं बनाता, तो उन्हें केवल सुबह का हल्का नाश्ता खाकर ही दिन गुजारना पड़ता है।
पुरानी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
विद्यालय प्रबंधन समिति और प्राचार्य की ओर से पहले भी कई बार शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। जिला शिक्षा अधिकारी राजेश गोयल ने मंगलवार को ही बयान दिया था कि बीआरसी को जांच के निर्देश दिए गए हैं और दोषी पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। लेकिन गुरुवार को बच्चों को खाना न मिलने की घटना साबित करती है कि विभाग समूह के दबाव में है और कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर रहा।
बच्चों का स्वास्थ्य और भविष्य दांव पर
मध्यान्ह भोजन योजना का मकसद बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई में सुधार करना है, लेकिन रामपुर में हालात इसके उलट हैं। समूह संचालक की दबंगई के चलते कभी खाना अधूरा बनाया जाता है, कभी बच्चों को थालियां धोने पर मजबूर किया जाता है और अब तो सीधे-सीधे खाना बनाना ही बंद कर दिया गया। यह हालात न केवल योजना की बदहाली को दर्शाते हैं बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
इनका कहना है
मां शारदा समूह की लगातार शिकायत करने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी ठोस कार्यवाही नहीं करते गांव के बच्चे तो घर खाना खा लेते पर छात्रावास की बच्चियां को भूखे रहना पड़ता है। गुरुवार को खाना ही बनाया गया ओर अन्य दिन भी काफी कम मात्रा में खाना बनाया जाता है जो सभी हो भी पाता आज भी समूह को नोटिस दिया गया है। संजय मराठा, प्राचार्य रामपुर
