
नेपानगर। सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति के लिए सरकार करोड़ों रूपए खर्च करती हैए लेकिन इसके बाद भी कईं जगह बच्चों के दाखिले नहीं हो पाते लेकिन क्षेत्र में अब एक नवाचार कर बच्चों का अधिक से अधिक संख्या में नामांकन कराने का नवाचार किया जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। कुछ स्कूलों ने इसकी पहल भी कर दी है। आने वाले समय में उन्हें इसके लिए प्रमाण पत्र और शील्ड से सम्मानित किया जाएगा।
दरअसल जन शिक्षा केंद्र भातखेड़ा के तहत एक नवाचार किया गया है जिसमं संकुल की शालाओं में सर्वाधिक बच्चों को कक्षा पहली में दर्ज करानेए नामांकन कराने वाली स्कूलों को संकुल केंद्र भातखेड़ा प्राचार्य द्वारा शील्ड और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा।
नवाचार से बढ़ी विद्यार्थियों की संख्या:- नवाचार के तहत वर्ष 2024.25 में संकुल केंद्र भातखेड़ा में कक्षा पहली की जो दर्ज संख्या थी वह 354 थीए लेकिन वर्ष 2025.26 में बढक़र 550 हो गई इसमें
कुल 196 बच्चों को कक्षा पहली में दर्ज नामांकन अधिक हुआ है जो कि सराहनीय कार्य है। सर्वाधिक बच्चों को दर्ज नामांकन करने में जिन स्कूलों में प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ स्थान प्राप्त किया है उसमें प्रथम एकीकृत माध्यमिक शाला मांडवा शामिल है जिसमें अब तक कुल 111 बच्चों को कक्षा पहली में दर्ज किया गया। दूसरे नंबर एकीकृत माध्यमिक शाला बाकड़ी है। यहां 47 बच्चों को दर्ज किया गया। तीसरी प्राथमिक शाला चैनपुरा है यहां 45 बच्चों को कक्षा पहली में दर्ज किया गया। प्राथमिक शाला सागफाटा जहां पर 44 बच्चों को कक्षा पहली में दर्ज किया गया है। नवाचार के तहत संकुल केंद्र भातखेड़ा में 196 बच्चे अधिक प्लस में कक्षा पहली में अधिक दर्ज किया गया है। जन शिक्षक राजेश कापड़े ने बताया कक्षा पहली में सर्वाधिक बच्चे जिस शाला में दर्ज होंगे उसे शाला को प्रतिवर्ष शील्ड और प्रशस्ति पत्र के माध्यम से संकुल प्राचार्य द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
संकुल को नवाचार से हुआ फायदा:-नवाचार के तहत संकुल केंद्र भातखेड़ा को इसका फायदा हुआ है। यहां 196 बच्चे अधिक कक्षा पहली में दर्ज किए गए। पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2025.26 में कक्षा पहली में 196 अधिक बच्चों को दर्ज नामांकित किए गए। यह कार्य जनशिक्षक भातखेड़ा द्वारा माह अप्रैल से घोषणा कर प्रारंभ किया गया था। इसका असर अब देखने को मिल रहा है।
उपस्थिति पर नहीं दिया जाता ध्यान
गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाता। जब तक सरकारी कार्यक्रम चलते हैं तब तक ही ऐसा होता है। इसके बाद बच्चों को लेकर गंभीरता नहीं बरती जाती।
