
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उच्च शिक्षा विभाग की भर्ती में ओबीसी के बैकलॉग पदों में हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने अंतरिम आदेश के तहत कहा कि यदि कोई नियुक्ति की जाती है तो वो इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगी। एकलपीठ ने मामले में राज्य सरकार व मप्र लोक सेवा आयोग को जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को निर्धारित की है।
दरअसल यह मामला सागर निवासी लीलाधर लोधी, दीपक सिंह ठाकुर, इंदौर निवासी शुभम चौधरी, प्रेमलता, बालाघाट निवासी खुशबू चौरसिया व अन्य की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व हितेंद्र गोहलानी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि आयोग ने 30 दिसंबर 2024 को उच्च शिक्षा विभाग में अंग्रेजी विषय में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। इसमें 2019 के पूर्व के अंग्रेजी विषय में ओबीसी वर्ग के कुल 31 बैकलॉग पदों को शामिल किया गया है। दलील दी गई कि आयोग ने 30 दिसंबर 2022 को अंग्रेजी विषय में सहायक प्राध्यापक के कुल 200 पद विज्ञापित किए थे। उसमें ओबीसी के बैकलॉग पद विज्ञापित नहीं किए गए थे। उसकी नियुक्ति प्रक्रिया अभी जारी है। याचिकाकर्ता उक्त 2022 की भर्ती परिक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन उनको साक्षात्कार में कम अंक देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके अलावा कई ओबीसी के अभ्यर्थियों को 13 फीसदी में होल्ड भी कर दिया गया है। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
