नयी दिल्ली, 18 अगस्त (वार्ता) वित्त मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली प्रवर्तन एजेंसी राजस्व खुफिया निदेशालय (वार्ता) के अधिकारियों ने भोपाल में मादक दवायें बनाने वाले एक अवैध कारखाने का भंडाफोड़ कर 92 करोड़ रुपये मूल्य का 61.2 किलो ग्राम मेफेड्रोन ड्रग जब्त किया है।
एजेंसी ने मादक पदार्थ के इस कारोबार में कथित रूप से लिप्त सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
सोमवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार ठोस खुफिया जानकारी के आधार पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने “ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक” नाम से एक अभियान में यह सफलता प्राप्त की। इसमें सूरत और मुंबई पुलिस ने भी सहयोग किया।
डीआरआई ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर छापे मारे और इस गिरोह के सात प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया।
विज्ञप्ति में बताया गया है कि 16 अगस्त को मध्य प्रदेश के हुज़ूर तहसील के ग्राम-जगदीशपुर (इस्लामनगर) में मादक दवाओं के अवैध कारखाने की तलाशी में 61.20 किलोग्राम मेफेड्रोन (तरल रूप में) बरामद किया। जब्त अवैध माल की बाजार में कीमत 92 करोड़ रुपये आंकी गई। इसके अलावा वहां से 541.53 किलोग्राम कच्चा माल, जिसमें मेथिलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमेथिलमाइन (एमएमए), हाइड्रोक्लोरिक एसिड (एचसीएल), और अन्य रसायन तथा प्रसंस्करण उपकरणों का एक पूरा सेट भी जब्त किया गया।
यह कारखाना एक एकांत परिसर में स्थित था और जानबूझकर चारों ओर से ढका हुआ था ताकि यह किसी की पकड़ में नहीें आए। मेफेड्रोन के निर्माण के लिए ज़िम्मेदार केमिस्ट सहित दो व्यक्तियों को अवैध उत्पादन प्रक्रिया में लिप्त पाया गया।
इस मामले में त्वरित कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के बस्ती में ड्रग कार्टेल के एक प्रमुख सदस्य को गिरफ्तार किया गया, जिसे भिवंडी (मुंबई) से भोपाल तक कच्चे माल की आपूर्ति की देखरेख का काम सौंपा गया था। अवैध रूप से रसायन/कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले दो आपूर्तिकर्ताओं को भी मुंबई से गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही मुंबई से भोपाल तक रसायनों/कच्चे माल के परिवहन के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया।
प्रारंभिक जाँच में यह भी पता चला है कि हवाला के ज़रिए सूरत और मुंबई से भोपाल में धन हस्तांतरित किया जा रहा था। धन हस्तांतरण के लिए ज़िम्मेदार कार्टेल के एक करीबी सहयोगी को भी सूरत में गिरफ्तार किया गया।
एजेंसी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी सात व्यक्तियों ने एक विदेशी ऑपरेटर और भारत में मेफेड्रोन नेटवर्क के सरगना के निर्देश पर मेफेड्रोन के गुप्त निर्माण में अपनी-अपनी भूमिका स्वीकार की है।
मेफेड्रोन स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत सूचीबद्ध है।माना जाता है कि यह कोकीन और एम्फ़ैटेमिन के सेवन जैसा प्रभाव पैदा करता है।
यह पिछले एक साल में डीआरआई द्वारा ध्वस्त की गई छठी गुप्त मेफेड्रोन फैक्ट्री है। डीआरआई मादक दवाओं का निर्माण करने वाली अवैध फैक्ट्रियों को ध्वस्त करने और उनके मास्टरमाइंडों तथा इसमें शामिल अंतरराष्ट्रीय गिरोहों की तलाश में लगातार सक्रिय है।
