भोपाल:संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य एवं युवा प्रेरक वक्ता मुनि श्री 108 संधान सागर महाराज ने 24 घंटे एक आसन में प्रतिमायोग धारण कर सभी को चकित कर दिया। प्रातः 5 बजे से अगले दिन प्रातः 5 बजे तक चले इस ध्यान ने साधना की गहराई का अद्भुत संदेश दिया। मुनि श्री पूर्व में भी सम्मेदशिखरजी, पावापुरी, चम्पापुरी, बावनगजा, गजपंथा, रामटेक, अंजनगिरी, एलोरा जैसे तीर्थों पर 24, 36, 48 और 72 घंटे तक प्रतिमायोग साधना कर चुके हैं।
भोपाल चातुर्मास में प्रत्येक सोमवार मुनि श्री मौन और उपवास का पालन करते हैं। लगभग 22 वर्षों से नमक-शक्कर और पिछले 6 वर्षों से हरे फल-सब्ज़ी का त्याग कर वे कठोर तपस्या में निरंतर रत हैं। उनकी साधना जैन धर्म की प्रभावना का अद्वितीय उदाहरण है, जिसे समस्त समाज नमन करता है।
