
सतना: जिले में बिजली की अघोषित कटौती उपभोक्ताओं के लिए स्थायी समस्या बन चुकी है. चाहे भीषण गर्मी हो, उमस हो या बारिश का मौसम, हर स्थिति में लोगों को बिजली गुल होने की परेशानी झेलनी पड़ रही है. पिछले छह महीनों से अधिक समय से विद्युत वितरण व्यवस्था पूरी तरह से लडख़ड़ाई हुई है, जिससे उपभोक्ता 20 साल पुरानी स्थिति लौटने की आशंका जताने लगे हैं.
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की बारिश या हवा के झोंके के साथ ही लाइन ट्रिप होना आम बात बन चुका है. यहां तक कि सामान्य मौसम में भी घंटों आपूर्ति बाधित रहती है. उपभोक्ताओं का भरोसा अब इस बात पर से उठ चुका है कि बिजली लगातार एक घंटे भी उपलब्ध रहेगी. स्थिति यह है कि शहर के लगभग 40 फीसदी क्षेत्र दिन-रात कई बार ट्रिपिंग का शिकार होते हैं. इससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. जिला अस्पताल और जलापूर्ति जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं.
जिम्मेदारों द्वारा लोकल फाल्ट, ट्रिपिंग, तार जलना या ट्रांसफार्मर ओवरहीट होना जैसे बहाने दिए जाते हैं, लेकिन साल भर के मेंटिनेंस के बावजूद सुधार नहीं दिखता. दूसरी ओर भारी-भरकम बिजली बिल और स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव उपभोक्ताओं को और आक्रोशित कर रहा है. जंग लगे खंभे, लटकती तारें, जर्जर ट्रांसफार्मर और सब-स्टैंडर्ड उपकरण इस व्यवस्था की हकीकत उजागर करते हैं. नतीजतन, बिजली के इंतजार में लोग और इन्वर्टर-बैटरी विक्रेता दोनों ही मजबूरी और राहत के बीच जी रहे हैं
