सतना: स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरवासियों को आधुनिक और सुविधाजनक शौचालय सुविधा देने के लिए नगर निगम ने करीब आठ साल पहले लाखों रुपये खर्च कर सेंसर बेस्ड ई-टॉयलेट्स खरीदे थे। लेकिन, इन टॉयलेट्स का आज तक इंस्टालेशन नहीं हो सका। नतीजा, ये हाईटेक टॉयलेट्स शहर के कोने-कोने में धूल फांक रहे हैं और नगर निगम की लापरवाही की गवाही दे रहे हैं।
करीब 20 लाख रुपये की लागत से राजस्थान से मंगाए गए आधा दर्जन ई-टॉयलेट्स आज भी बेकार पड़े हैं, जिसके चलते सतना की स्वच्छता रैंकिंग पर सवालिया निशान लग रहे हैं। नगर निगम की इस लापरवाही का आलम यह है कि इन टॉयलेट्स को शहर के तीन प्रमुख स्थानों—रेलवे स्टेशन के पास होटल महामाया, स्टेशन रोड पर महिला समिति के पास और खेरमाई रोड पर त्रिमूर्ति नर्सिंग होम के पास—रखा गया है, लेकिन इन्हें शुरू करने के लिए जरूरी पानी की टंकी तक नहीं भरी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नगर निगम अपने संसाधनों का सही उपयोग करता, तो स्वच्छता सर्वेक्षण में सतना के अंक बढ़ सकते थे। लेकिन, बिना सोचे-समझे किए गए इस निवेश ने न केवल संसाधनों की बर्बादी की, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन की साख को भी ठेस पहुंचाई।
क्या है खासियत
सेंसर बेस्ड ई-टॉयलेट्स को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया था, जो शहर को स्वच्छ और हाईटेक बनाने में मददगार साबित हो सकते थे। इसमें 5 रुपये का सिक्का डालते ही गेट खुलता है। इसे उपयोगकर्ता के लिए आसान और किफायती माना जाता है। ऑटोमैटिक फ्लश और सफाई के चलते टॉयलेट की स्वच्छता के लिए मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं रहती। ऑटोमैटिक गेट और लाइट सिस्टम में गेट खुलते ही लाइट ऑन और बंद होते ही ऑफ हो जाती है। प्योर स्टील का बाहरी कवर होने के कारण इन्हें लंबे समय तक टिकाऊ माना जाता है।
