ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ वोट चोरी का मुद्दा जोर शोर से उछाले जाने के बाद जहां सियासत गरमाई है वहीं कांग्रेस के नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक जोश में दिख रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद से ही मप्र में बैकफुट पर चल रही पार्टी को इसी बहाने अपने अच्छे दिन लौटने की उम्मीद लगी है। यही वजह है कि मप्र के कांग्रेस नेताओं ने अपने शीर्ष नेता द्वारा उठाए इस मुद्दे को हाथों हाथ लपका है और भाजपा के खिलाफ कार्यक्रमों और विरोध अभियानों की झड़ी लगा दी गई है।
चूंकि ग्वालियर चंबल अंचल की बगावत के कारण ही करीब पांच साल पहले प्रदेश की कांग्रेस सरकार का तख्तापलट हुआ था, लिहाजा मप्र कांग्रेस कमेटी ने अपने आंदोलनों का केंद्रबिंदु ग्वालियर को ही बना लिया है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, हरीश चौधरी से लेकर हेमंत कटारे समेत प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता आज ग्वालियर में ही थे और वोट चोरी के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शनों, अभियानों, मंत्रणा बैठकों और रैलियों में व्यस्त रहे। सबसे बड़ा आयोजन ग्वालियर पूर्व सीट से दूसरी बार विधायक बने सतीश सिकरवार ने रखा।
उनके नेतृत्व में ‘वोट सत्याग्रह तिरंगा यात्रा’ निकली जिसने दोपहर से रात तक करीब तीस किमी का सफर तय किया। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष पटवारी एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने न सिर्फ तिरंगा यात्रा को हरी झंड़ी दिखाकर रवाना किया बल्कि तीनों नेता यात्रा में साथ भी चले। सतीश जिस रफ्तार से पार्टी के कार्यक्रमों में मोर्चा संभाले हुए हैं और हर इवेंट में भीड़ जुटा रहे हैं, सियासत के जानकार इसे 2028 की तैयारी मान रहे हैं। बहरहाल, शहर कांग्रेस ने भी वोट चोरी के मुद्दे पर आज रात कैंडल मार्च निकाला। कुछ घंटों के लिए कांग्रेस दफ्तर से गांधी पार्क तक की रोड कांग्रेसमय होती दिखी। बहरहाल विधानसभा चुनाव में अभी तीन साल से कुछ ज्यादा वक्त बाकी है और फिलवक्त पार्टी में जो जोश दिख रहा है, उसे इस लंबे वक्त तक बरकरार रखने के लिए पार्टी को अपने कार्यक्रमों की निरंतरता बनाए रखनी होगी।
सुबह संघ वालों ने उठाए सवाल, शाम को मंत्रीजी जाम में फंस गए
जिस रोज संघ के एक बड़े ओहदेदार ने अखबारों के संपादकों से अनौपचारिक बातचीत में ग्वालियर की ट्रैफिक व्यवस्था को प्रदेश में सबसे खराब करार दिया और प्रतिपक्ष के साथ सत्तापक्ष के कुछ लोगों को भी अपने शहर की यह खामी उजागर करना बर्दाश्त नहीं हुआ, उसी रात सूबे के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस खूबसूरत शहर की सड़कों पर जाम में फंस गए। मंत्री महोदय का नाराज होना स्वाभाविक था।
उन्हें अपनी चिंता नहीं बल्कि वीआईपी मूवमेंट्स के दौरान तमाम सड़कों पर ट्रैफिक ब्लॉक करने से आम जनता को होने वाली परेशानी की फिक्र थी। दअरसल, विजयवर्गीय को सीएम के साथ राजकीय प्लेन से भोपाल लौटना था। महाराजपुरा एयरपोर्ट पर सीएम डॉ. मोहन यादव विजयवर्गीय का इंतजार करते रहे लेकिन मंत्रीजी जाम में ऐसे फंसे कि बमुश्किल निकल सके। सीएम को उन्हें बिना लिए ही वापस लौटना पड़ा। इधर विजयवर्गीय ने अफसरों पर जमकर गुस्सा निकाला और वीआईपी मूवमेंट के दौरान इस तरह के वाकयात की आगे पुनरावृत्ति न होने के लिए सख्त ताईद किया। प्लेन छूटने के बाद विजयवर्गीय को भोपाल के लिए ट्रेन पकड़ना पड़ी।
जब तक सूची जारी नहीं, तब तक कांग्रेस में छह जिलाध्यक्ष !
ग्वालियर चंबल में कांग्रेस के नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अगले एक दो रोज में हो जाएगी। सूत्रों की मानें तो सूची बिल्कुल तैयार है, बस ऐलान होना बाकी है। जब तक विधिवत सूची जारी नहीं होती है तब तक ग्वालियर कांग्रेस के करीब आधा दर्जन नेता खुद को नया जिलाध्यक्ष मानकर चल रहे हैं। दअरसल, ये आधा दर्जन नेता वे हैं, जिनके नाम एआईसीसी और पीसीसी के पर्यवेक्षकों ने स्थानीय कांग्रेस दफ्तरों पर रायशुमारी के बाद पैनल में शामिल किए थे। यह बात अलग है कि केसी वेणुगोपाल और हरीश चौधरी ने पर्यवेक्षकों से चर्चा कर नामों में काटछांटकर प्रत्येक जिले में पैनल को दो दो नामों तक सीमित कर दिया है। सूची जारी होने से पहले ही पार्टी में संभावित नए अध्यक्षों को बधाईयों का सिलसिला शुरू हो गया है।
चैंबर में शुरू हो गईं चुनावी सरगर्मियां
चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव में अभी आठ महीने बाकी है लेकिन अध्यक्ष पद के लिए अभी से गोठ करने और गोटियां भिड़ाने का सिलसिला शुरू हो गया है। मुरार के व्यापारी नेता पारस जैन द्वारा रंगमहल गार्डन में रखी गई गोठ पार्टी को अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
