धाकड़-सोजतिया विफल रहे, फिर जागी उम्मीद

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

गरोठ को जिला बनाने की दशकों की मांग फिर जोर पकड़ रही है. हर बार मामला फिसलता रहा, अब संघर्ष समिति को मोहन सरकार में गरोठ जिला बनने की उम्मीद बलवती है. गरोठ के युवा सहित बुजुर्ग और कई संगठनों ने एकजुट होकर जिला बनाओ संघर्ष समिति के माध्यम से कई बार पहले भी प्रयास कर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक सबको पत्र लिखे, आंदोलन भी किए पर नीमच जिला बन गया और गरोठ वासी खाली हाथ रहे.

गरोठ- भानपुरा विधानसभा में कई नेता आए ओर चले गए लेकिन गरोठ को जिला बनाने के लिए जितनी कड़ी मशक्कत पूर्व भाजपा विधायक देवीलाल धाकड़ और पूर्व कांग्रेस विधायक और मंत्री रहे सुभाष सोजतिया ने की उतनी किसी नेता नहीं की. कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान के कारण सोजतिया गरोठ जिला नहीं बना पाए. पूर्व विधायक देवीलाल धाकड़ ने भी कई प्रयास किए लेकिन गुरु चेले के वचनबद्ध शिवराज मामा गरोठ को जिला बनाने के आश्वासन के अलावा जिला बनाने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए. अब मोहन सरकार से आशा है, लेकिन क्षेत्रीय विधायक चंदर सिंह सिसोदिया को ठोस प्रयास करने पड़ेंगे.

गरोठ में जिला बनाओ संघर्ष समिति ने एक बैठक के दौरान कहा कि हम इस तहसील को हर हाल में जिला बनवा कर रहेंगे. पूर्व विधायक देवीलाल धाकड़ ने भी इस बात का समर्थन किया और कहा है कि हम गरोठ को जिला बनाने के लिए हर संभव प्रयत्न जारी रखेंगे भौगोलिक दृष्टिकोण हो या अन्य, हर तरह से गरोठ जिला बनने के उम्मीदों पर खरा उतरता है. गाँधी सागर से मंदसौर की दूरी तय करने में कई घंटों का समय लगता है. गाँधी सागर से लेकर भानपुरा, गरोठ, भेसोदा, बोलिया ,शामगढ़ की आमजनता और छोटे बड़े काम में गरीब मजदूर सुबह से शाम तक लम्बी दूर तय कर परेशान होते रहते हंै. गरोठ जिला बनने से इनकी यह समस्या दूर हो जाएगी.

माफिया- तस्कर बाधक

क्षेत्र में बढ़ते माफिया राज और तस्करों सहित काला बाजारी वाले गिरोह नहीं चाहते कि गरोठ जिला बनें. जिला बनने पर सभी विभागों के मुख्यालय यहां आ जाने सेे इन लोगों की कारगुजारी पर सीधा असर पड़ेगा. अवैध गतिविधियों पर तगड़ा शिकंजा होने से इनके कामधंधों पर अंकुश रहेगा. दूसरी तरफ गरोठ के जिला बनने से लाखों लोगों को फायदा होगा. इससे एक तरफ जहां सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी वहीं युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. अभी तस्कर-माफियाओं के लिए राह भटके बेरोजगार उनकी अवैध गतिविधियों में मुख्य कड़ी हैं. सो राजनीतिक दलों में घुसे इनके तथाकथित दलाल अंदरूनी रोड़ा अटका कर गरोठ को जिला बनाने में बाधा पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते.

फिर लंपी वायरस की दहशत

रतलाम और ग्रामीण क्षेत्रों के गोपालकों में फिर लंपी वायरस की दहशत है. 2022 में भी लंपी वायरस गोवंश में फैला था, जो गायों के लिए महामारी साबित हुआ था. तब कई गायों की मौत के साथ ही दुग्ध उत्पादन पर भी बड़ा असर पड़ा था. फिलहाल रतलाम शहर और पास के गांव खेतलपुर में कुछ पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण देखे गए हैं. इसके मद्देनजर गोपालक गायों को बाहर से चारा लाकर खिलाने से बच रहे हैं . उन्हें डर है कि बाहर से लाए गए हरे चारे की वजह से वायरस फैल सकता है. उधर पशु चिकित्सा विभाग भी सतर्क हो गया है और मातहत क्षेत्र के पशुओं पर नजर बनाए हैं

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