विन्ध्य की डायरी
डॉ रवि तिवारी
काला सफेद के युग में बनी फिल्म कागज के फूल का एक गीत ….वक्त ने किया क्या हसीं सितम तुम रहे न तुम हम रहे न हम…. फिलहाल विन्ध्य की जनता के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है. सदियों से जंगल पहाड़ में रहने वाली विन्ध्य की जनता जिस चहुँ मुखी विकास की कल्पना मन मे सजोए अपनी धरोहरों को लुटाती आ रही है. वह आज भी बदस्तूर कायम है. विन्ध्य की जनता ने जिस पर भी भरोसा किया. उसी ने उसके साथ सौदेबाजी करने में तनिक भी देर नही की.
देश दुनिया के बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने यहाँ की संपदा का दोहन कर अरबों कमाए पर जनता को उसकी मजदूरी छोड़ कभी कुछ अतिरिक्त नही मिला. कुछ ऐसा ही मसला विन्ध्य के पुनर्गठन के दौरान सामने आया है. मध्यप्रदेश के निर्माण में सबसे ज्यादा पैतीस रियासतों की बलि देने वाले विन्ध्य के नेता अब गांवों को इधर-उधर करने में आमादा है. हालांकि बात बढ़ते देख सभी ने यहीं कहा कि वो ऐसा नही चाहते हैं.
तब प्रश्न यह उठता है कि यह बात सामने कैसे आयी. भोपाल ने किसके कहने पर पत्र जारी कर मुकुंदपुर को अमरपाटन से अलग कर रीवा जोडऩे के लिए स्थानीय अधिकारियों से अभिमत मांग लिया. खैर उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने ऐसा कभी नही चाहा और न ही किसी प्रकार की कोशिश की. फिलहाल सौदागरों के हाथ की कठपुतली बन चुकी व्यवस्था में यह तो तय है कि इससे किसी न किसी का कोई बड़ा लाभ छिपा हुआ है. जो सत्ता की बागडोर के सहारे विन्ध्य की किसी बड़ी धरोहर को अपने कब्जे में करना चाहता है. यह बात हो सकता है आने वाले समय में सामने आ जाए.
न्याय सत्याग्रह के पीछे शक्ति प्रदर्शन
विधानसभा-लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने वाली कांग्रेस पार्टी न्याय सत्याग्रह के बहाने शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है. बढ़ते अपराध, बिगड़ी कानून व्यवस्था सहित विभिन्न जन समस्याओ को लेकर कांग्रेस प्रदेश सरकार को रीवा में घेरेगी. गुटबाजी में उलझी पार्टी जन समस्याओ को लेकर मैदान में भले ही दिखाई न दे पर जब खुद पर कोई बात आती है तो उसे अन्याय, अत्याचार और बिगड़ी कानून व्यवस्था का रूप देकर नेता जन आन्दोलन की बात करते है. खाद-बीज से जिले का किसान आषाढ़ के महीने में जूझता रहा पर कांग्रेसी नेताओं के कान में जूं तक नही रेंगी. विपक्ष की भूमिका को याद करते हुए न्याय सत्याग्रह कांग्रेस करने जा रही है. भला मंच के भाषण से जनता का क्या कल्याण होने वाला है. केवल शक्ति प्रदर्शन के लिये यह सब किया जा रहा है. जग जाहिर है कि कांगे्रस छत्रपो की राजनीत में उलझी हुई है.
विंध्य में सुमंगल साइकिल
शोरगुल और तमाम तामझाम फोटो सेसन के साथ नित नए अभियानों की शुरूआत होती है पर वक्त के साथ नवाचार अभियान दम तोड़ देते है. फिर चाहे पर्यावरण या स्वास्थ्य से जुड़े अभियान हो, विंध्य में संभागायुक्त बीएस जामोद की पहल पर साइकिल का सफर शुरू हुआ है. पर्यावरण संरक्षण, इधन की बचत और स्वास्थ्य रक्षा का संदेश देने के लिये संभाग के सभी जिलो में मंगलवार को सुमंगल साइकिल अभियान शुरू किया गया. आला अफसर खुद कमिश्नर कार छोड़ साइकिल की पायडल मारते हुए दफ्तर पहुंचे. कुछ अफसर पैदल सफर तय किये. बेशक अच्छी पहल है लेकिन जब यह निरंतर चलती रहे. कई अधिकारी अपना जलवा बनाए रखने के लिये कार से ही पहुंचे, कैमरा देख मुंह छिपाते नजर आए. स्वैच्छिक रूप से मंगलवार को साइकिल चलाकर कार्यालय आने का यह अभियान कितना कारगर होगा यह तो वक्त बताएगा
