राहुल के “वोट चोरी” के आरोप पर वार-पलटवार

दिल्ली डायरी

प्रवेश कुमार मिश्र

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों जिस तरह से कर्नाटक के एक विधानसभा क्षेत्र को आधार बनाकर वोट चोरी का आरोप लगाया था उसके बाद वार-पलटवार आरंभ हो गया है. भाजपा जहां एक तरफ राहुल गांधी के एटम बम फोड़ने के दावे को अलग-अलग विशेषण के साथ हास्यास्पद बनाने के प्रयास में जुटी है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनाकर एक साथ चुनाव आयोग की संवैधानिक वचनबद्धता को कटघरे में खड़ा करने के साथ-साथ भाजपा की कथित निरंकुश नीति को उजागर कर भाजपाई विजय को धोखे की जीत बताने के प्रयास में लगी है. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस विषय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया सुनने को मिल रही है. कांग्रेस के अलावा इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के कुछ नेता राहुल के दावे को तथ्यों से परे बताकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठाने से बचने की सलाह दे रहे हैं.

चुनावी बैतरणी पार करने की तैयारी

बिहार वोटर वेरिफिकेशन यानी एसआईआर के मुद्दे को दिल्ली के सड़क से संसद तक आरंभ हुए विरोध को बिहार के हरेक ब्लाक स्तर पर पहुंचाने के प्रयास में जुटी कांग्रेस पार्टी अब इसके सहारे चुनावी बैतरणी पार करने की तैयारी कर रही है. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल एक सोची-समझी रणनीति के तहत एसआईआर के मुद्दे को बिहार विधानसभा चुनाव तक जिंदा रखना चाहते है. इतना ही नहीं एसआईआर दूसरे प्रदेशों में लागू नहीं किया जा सके इसके लिए विपक्षी दलों के नेता एकजुट होकर मोर्चाबंदी कर रहे हैं.

उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर सस्पेंस

अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा , इस सवाल को लेकर संसद के अंदर व बाहर गुफ्तगू हो रही है. विपक्षी समूह भी एक ऐसे उम्मीदवार को खड़ा करना चाहते हैं जिसकी अंकगणित आधार पर भले ही हार हो जाए लेकिन राजनीतिक संदेश के सहारे राजनीतिक लाभ मिलता रहे. जबकि सत्ता पक्ष के रणनीतिकार बहुस्तरीय समीकरण को साधकर एक ऐसे उम्मीदवार को खड़ा करना चाहते हैं जिसकी तुलना यदि निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की योग्यता और वचनबद्धता से हो तो वह कम नहीं दिखे. ऐसी स्थिति में संघ के सुझाव के आधार पर भाजपाई रणनीतिकारों द्वारा कुछ नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास भेजे गए है. चर्चा है कि पक्ष व विपक्ष उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरण पर ज्यादा जोर दे रहे हैं.

धमक दिल्ली तक

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा द्वारा राजद पर राजद द्वारा भाजपा पर और जनसुराज द्वारा राजद, कांग्रेस, भाजपा व जदयू पर चल रहे आरोप प्रत्यारोप की धमक दिल्ली में भी महसूस हो रही है. संसद के मानसून सत्र के दौरान बिहार से संबंध रखने वाले सांसद भी संसद के गलियारों में इन दिनों इशारों-इशारों और व्यंग्यात्मक लहजे में एक दूसरे के नेताओं पर आरोप लगाते दिख रहे हैं. हालांकि जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर ने जिस तरह से पिछले दिनों भाजपा व जदयू के नेताओं पर तथ्यात्मक आरोप लगाया है उसके कारण कोई भी प्रशांत किशोर के खिलाफ औपचारिक रूप से बोलने से बच रहा है. चर्चा है कि बिहार के बड़े बड़े नेताओं के अंदर प्रशांत का डर इस कदर बैठ गया है कि वे अपने को उसकी नजरों से बचने के प्रयास कर रहे हैं.

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