इंदौर: एमटीएच अस्पताल में 22 जुलाई को जन्मी दो सिर वाली नवजात बच्ची को उसके परिजन इलाज अधूरा छोड़ गांव ले गए. बच्ची ऑक्सीजन सपोर्ट और वेंटिलेटर पर थी. डॉक्टर्स द्वारा लगातार निगरानी के बावजूद जब परिजनों को सुधार की उम्मीद नहीं दिखी और आर्थिक भार बढ़ता गया, तो उन्होंने खुद ही छुट्टी की प्रक्रिया पूरी कर बच्ची को घर ले जाना बेहतर समझा.
परिजनों ने बताया कि वे देवास जिले के पलासी-पाचपुर गांव के निवासी हैं और अब तक इलाज में करीब 30 हजार रुपए खर्च हो चुके थे. डॉक्टर्स ने बताया था कि बच्ची को ठीक होने में कितना समय लगेगा, यह कह पाना संभव नहीं है.
इस स्थिति में परिवार ने ‘लामा’ यानी लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस की प्रक्रिया से छुट्टी ले ली. एमटीएच के डॉक्टर सुनील आर्य का कहना है कि जब मरीज के परिजन खुद इलाज अधूरा छोड़ हॉस्पिटल से डिस्चार्ज की मांग करते हैं, तो उसे मेडिकल टर्म में लामा कहा जाता है, बच्ची को लामा के तहत अस्पताल से छुट्टी दी गई.
