जबलपुर: मप्र शासन की केबिनेट में निर्णय लेकर स्टाम्प ड्यूटी में की गई बढ़ोत्तरी से अधिवक्ता व लोगों में आक्रोश है। उक्त फैसले पर मप्र स्टेट बार काउंसिल के वाईस चेयरमेन आरके सिंह सैनी ने भी हैरानी व्यक्त की है। उन्होंने इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र भेजकर उक्त निर्णय पर पुनर्विचार कर उक्त फैसले को निरस्त किये जाने की मांग की है।
एसबीसी वाईस चेयरमेन श्री सैनी ने मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र में कहा है कि मप्र एक पिछड़ा राज्य है और प्रदेश की ज्यादातर जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे निवास करती है। केबिनेट बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार जो शपथ पत्र पूर्व में 50 रूपये के स्टाम्प पर किया जाता था, उसके लिए दो सौ रुपये की स्टाम्प अनिवार्यता की गई है। इसी प्रकार अचल संपत्ति के एग्रीमेंट के लिए जो किए पूर्व में एक हजार रूपए का स्टाम्प लगता था, उक्त फैसले में दो हजार रुपये कर दिया गया है।
इतना ही नहीं सहमति विलेख पूर्व में एक हजार रुपये में होती थी, जिसे सीधे पांच हजार रुपये किया गया है। पॉवर ऑफ अटर्नी की एक हजार जगह दो हजार रुपये कर दिया गया है, जो कि प्रदेश की आम जनता के लिए न्यायोचित नहीं है और नियमानुसार गलत है। श्री सैनी ने पत्र में कहा है कि उक्त की गई बढ़ोत्तरी का बोझ प्रदेश की गरीब जनता नहीं उठा सकती।
श्री सैनी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कई जगह राशि वितरित कर रहीं है, इसका यह मतलब नहीं कि उसकी वसूली आमजनता से की जाये। श्री सनी ने पत्र में आम जनता के हितों को देखते हुए केबिनेट के उक्त फैसले पर पुनर्विचार किये जाने की मांग की है।
