नाबालिग अवस्था में हुए मामूली अपराध का खुलासा नहीं करने पर नहीं कर सकते अयोग्य करार

जबलपुर:नाबालिग अवस्था में हुए मामूली अपराध का खुलासा नहीं किये जाने के कारण नियुक्ति के लिए अयोग्य करार दिये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि गंभीर अपराध नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता को लिखित व शारीरिक परीक्षा के आधार पर नियुक्ति प्रदान की जाये।

सतना निवासी पुष्पराज सिंह की तरफ से साल 2021 में दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उसने सेना भर्ती कार्यालय जबलपुर में सैनिक के पद नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। लिखित व शारीरिक परीक्षा में सफल होने के बावजूद भी उसे इस आधार पर अयोग्य ठहरा कि उसने नाबालिग होने के कारण दर्ज आपराधिक प्रकरण की जानकारी प्रस्तुत नहीं की है।

एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने नाबालिग होने के दौरान मई 2017 में अपने साथी के साथ मिलकर एक युवक के साथ गाली-गलौज की थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में आपराधिक प्रकरण की सुनवाई थी। उसने द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने पर किशोर न्याय बोर्ड ने एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया था। याचिकाकर्ता का चयन सशस्त्र बल में नहीं हुआ है, इसलिए मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के द्वारा की गयी है।

एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि किशोरावस्था में हुए अत्यंत मामूली अपराध का खुलासा नहीं किये जाने के कारण याचिकाकर्ता को अयोग्य नहीं माना जाना चाहिये। करने को अयोग्यता माना है, स्वीकृति नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता के लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षण के परिणाम के आधार एक महीने के भीतर नियुक्ति संबंधित कार्यवाही की जाये।

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