जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की उस कार्रवाई को निरस्त कर दिया जिसके तहत जबलपुर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (जेडीसीए) की वर्तमान कार्यकारिणी को भंग कर नई बॉडी को मान्यता दे दी थी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने एकलपीठ के उस फैसले को भी खारिज कर दिया जिसके तहत जेडीसीए को बहाल करने का आदेश निरस्त कर दिया गया था। हालांकि हाईकोर्ट ने आपत्तिकर्ता सुरेंद्र वर्मा को यह स्वतंत्रता दी है कि वे जेडीसीए के खिलाफ नए सिरे से कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।
जेडीसीए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर व समरेश कटारे ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि जेडीसीए का गठन 1999 में हुआ था। वर्ष 2006 तक की कार्यकारिणी में सुरेंद्र वर्मा ज्वाइंट सेक्रेटरी थे। 2006 में नई कार्यकारिणी बनी। रजिस्ट्रार ने एसोसिएशन से वार्षिक जनरल मीटिंग की जानकारी मांगी। चूंकि पुरानी बॉडी ने 2004 से 2006 तक की जानकारी नई कार्यकारिणी को उपलब्ध नहीं कराई थी, इसलिए रजिस्ट्रार को पूरी जानकारी नहीं दे पाये।
इस पर रजिस्ट्रार ने 2013 में जेडीसीए को भंग कर दिया। एसोसिएशन की ओर से सभी जानकारी भेजी गई, जिसके बाद जनवरी 2014 में जेडीसीए को बहाल कर दिया गया। इसके बाद सुरेंद्र वर्मा ने 11 साल बाद उसी मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस आधार पर याचिका निरस्त कर दी कि वह देरी से पेश की गई। इसके साथ ही एकलपीठ ने 2014 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें जेडीसीए को बहाल कर दिया गया था। इसलिए जेडीसीए की ओर से युगलपीठ के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई।
