न्यायालय ने तमिलनाडु में सरकारी योजनाओं में जीवित व्यक्ति, पूर्व मुख्यमंत्री, वैचारिक प्रतीक के नाम-फोटो का उपयोग करने से लगायी रोक

चेन्नई, (वार्ता) तमिलनाडु की द्रविड़ विचारधारा वालों द्वारा राज्य वित्तपोषित योजनाओं का नामकरण वैचारिक प्रतीकों और वर्तमान या पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम पर रखने की होड़ को न्यायिक नाराजगी का सामना करना पड़ा है। मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार को नये या पुनः ब्रांडेड सरकारी कल्याण कार्यक्रमों के नाम में किसी भी जीवित व्यक्तित्व के नाम का उपयोग करने से रोक दिया है।

मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की प्रथम पीठ ने एक अंतरिम आदेश में उन सरकारी योजनाओं की प्रचार सामग्री में पूर्व मुख्यमंत्रियों या वैचारिक प्रतीकों के चित्रों साथ ही साथ सत्तारूढ़ डीएमके के प्रतीक चिन्ह/प्रतीक/ध्वज के प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हम इस आशय का अंतरिम आदेश पारित करते हैं कि विभिन्न विज्ञापनों के माध्यम से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को शुरू करने एवं संचालित करने के दौरान किसी भी जीवित व्यक्तित्व का नाम, किसी पूर्व मुख्यमंत्री/वैचारिक नेता की तस्वीर या पार्टी का प्रतीक/प्रतीक/ध्वज शामिल नहीं किया जाएगा।”

इस बीच राज्य सरकार ने आदेश के खिलाफ अपील दायर करने का निर्णय लिया है। अंतरिम आदेश अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री, सांसद सीवी षणमुगम द्वारा दायर जनहित याचिका पर पारित किया गया है, जिसमें राज्यव्यापी विशेष शिविरों के माध्यम से लोगों के दरवाजे तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने के लिए शुरू किए गए बड़े पैमाने पर जनसंपर्क कार्यक्रम ‘उंगलुदन स्टालिन’ (स्टालिन आपके साथ) में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नाम के उपयोग के खिलाफ याचिका दायर की गई थी।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कल्याणकारी योजना के शुभारंभ, कार्यान्वयन या संचालन के विरुद्ध कोई आदेश पारित नहीं किया गया है और वर्तमान अंतरिम आदेश केवल योजनाओं के नामकरण और उनकी प्रचार सामग्री तक ही सीमित है। अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम आदेश प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री के आधार पर पारित किया गया है।

इसके अलावा, अदालत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक राज्य बनाम कॉमन कॉज और अन्य मामले में यह स्पष्ट किया था कि वर्तमान मुख्यमंत्री की तस्वीर का प्रकाशन स्वीकार्य है लेकिन वैचारिक नेताओं या पूर्व मुख्यमंत्रियों की तस्वीरों का उपयोग प्रथम दृष्टया में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।

इसके अलावा किसी सरकारी योजना के नामकरण में राजनीतिक हस्तियों का नाम रखना भी अस्वीकार्य है। साथ ही, सत्तारूढ़ दल के नाम का उपयोग सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग के फैसले के भी खिलाफ है।

पीठ ने ‘उंगलुदन स्टालिन’ कार्यक्रम के नामकरण के खिलाफ मुख्य याचिका पर राज्य सरकार और द्रमुक को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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