वीरेंद्र वर्मा
इंदौर: शहर में लगातार यातायात जाम होने से प्रशासन और अधिकारियों को जनता जमकर कोस रही है. शहर में यातायात की ऐसी बदतर हालत पहले कभी नहीं देखी गई. आज स्थिति यह है कि शहर के किसी ना किसी सड़क पर अथवा मुख्य मार्गों पर यातायात जाम हो रहा है. मीडिया द्वारा लगातार ट्रैफिक जाम के फोटो और खबरे छापने के बाद अधिकारियों ने थोड़ी सुध ली. बैठक में मातहत छोटे अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कारवाई. रिपोर्ट में सामने आया कि कई जगह निर्माण कार्यों के कारण जाम लग जाता है.
अब थोड़ा पीछे चलते हैं और जानते हैं कि आईडीए द्वारा खजराना, भंवरकुआं, लवकुश और फूटी कोठी फ्लाई ओवर बनाए गए, लेकिन इस दौरान त्रासदी वाला यातायात जाम नहीं हुआ. इसका कारण साफ था कि आईडीए के अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी ने माकूल इंतजाम किए थे. इसके उलट एनएचएआई, एमपीआईडीसी, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम द्वारा यातायात जाम रोकने की तरफ बिलकुल ध्यान नहीं दिया गया.
उक्त चारों एजेंसियों ने बारिश पूर्व और बारिश के दौरान व्यवस्थित ट्रैफिक चलाने के माकूल इंतजाम नहीं किए. शहर की जनता और वाहन चालक अब रोज जाम झेलने को मजबूर है. यातायात जाम की निरंतर खबरे छापने के बाद प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट ऑन रोड सेफ्टी का निर्देश हाथ लग गया. बस फिर क्या था, अपने गले का सांप निकालकर जनता के सिर हेलमेट के रूप में रख दिया, वो भी आनन फानन में! प्रशासन की हिटलर शाही देखो कि जब शहर में ट्रैफिक रेंगता है, तो हेलमेट का बोझ डालकर क्या ट्रैफिक गतिमान बन जाएगा? इसका जवाब है, नहीं… कभी नहीं.
मेन पॉवर लगाना होगा
दुर्घटना रोकने और यातायात जाम होने के उपाय जनता को हेलमेट पहनाना नहीं, बल्कि सड़कों खासकर प्रमुख सड़कों और मार्गो पर यातायात संचालन के लिए पुलिस, प्रशासन, निगम अधिकारी और निर्माणकर्ता कंपनियों को मेन पॉवर लगाना पड़ेगा. शहर में सभी मुख्य सड़कों पर धार्मिक जुलूसों को प्रतिबंधित करना होगा. ई रिक्शा चालकों पर नकेल कसना होगी और उनके भी चालान बनाने होंगे. सबसे ज्यादा ई रिक्शा के मार्ग निर्धारित करना होंगे और शहर में तो पूर्णतः प्रतिबंध लगाना होगा.
ई रिक्शा भी लगा रहा जाम
देखा जाए तो पिछले 3-4 सालों में ई रिक्शा ने शहर के ट्रैफिक जाम में चार चांद लगाने का काम किया है. महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी ई रिक्शा के मार्ग निर्धारित करने की बात कही थी, लेकिन वो भी आई गई हो गई. ट्रैफिक मित्र बनाए पर पीक टाइम सुबह 10 से 1 और शाम 4.30 से रात 9 बजे के समय ट्रैफिक पुलिस, मित्र और तमाम वेलेंटियर गायब रहते है. जब पीक टाइम में यातायात नहीं संभाल सकते है, तो ट्रैफिक मैनेजमेंट में अपनी असफलता और विफलता जनता के माथे क्यों डालना …..?
