नयी दिल्ली, 30 जुलाई (वार्ता) लोकसभा में विपक्ष ने मणिपुर हालात के लिए भाजपा और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वहां मानव सृजित आपदा उत्पन्न हुई है और यह सरकार की विपलता का परिणाम है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यांद राय ने आज मणिपुर में राष्ट्रपति शासन छह माह बढ़ाने के लिए सांविधिक संकल्प का अनुमोदन किया।
इस संकल्प पर कांग्रेस के एंटो एंटनी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि मणिपुर में जो घटनाएं हुई उससे वहां के हालत बहुत खराब है और प्रधानमंत्री ने चुप्पी साध रखी है। यह एक मानव सृजित आपदा है जो इस सरकार की विफलता है। सरकार ने इसे रोकने के बजाय बढ़ावा देने का काम किया। राज्य सरकार ने वहां हिंसा रोकने के लिए कोई काम नहीं किया गया। सरकार ने जानबूझकर चुप्पी साधी है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर में हमारे सैनिक असहाय हैं और महिलाएं भी सुरक्षित नहीं है।यह सरकार की पूर्ण विफलता है और नेतृत्व की कमी है। मणिपुर के हालात को काबू करने के बजाय उसे औऱ बढा दिया गया। उन्होंने कहा कि लोगों को मुख्यधारा से काट दिया गया है। वहां दो महीने से इंटरनेट नहीं है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने भी सितंबर में एक चेतावनी भेजी थी और कहा था कि वहां मानव अधिकारों का हनन हुआ है। वहां यौन शोषण हुआ और लोगों का उत्पीड़न हुआ है। इसके बावजूद सरकार की तरफ से कोई शांति बहाली के लिए कोई काम नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर के लोग काफी पीड़ित हैं उनकी पीड़ा का निवारण होना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा ने कहा कि मणिपुर में जिस प्रकार की स्थिति है उसके लिए सरकार जिम्मेदार है। वहां पर जिस प्रकार की स्थितियां बनी और जिस प्रकार महिलाओं और बच्चों के साथ अन्याय हुआ वह बहुत शर्मनाक है। भाजपा की सरकार ने जानबूझकर वहां ऐसी स्थिति पैदा की।
उन्होंने कहा कि छह महीने से राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर में शांति बहाल नहीं हो पाई है। भाजपा सिर्फ चुनाव जीतने के लिए सारे हथकंडे अपनाती है। सरकार को मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल कर वहां चुनाव कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा की नफरत के कारण हमारी विदेश नीति विफल हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को मणिपुर जाना चाहिए और शांति बहाल करने की पहल करनी चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष ने कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाना स्थाई समस्या का समाधान नहीं है। राष्ट्रपति शासन का लोगों की मानसिकता पर सही प्रभाव नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि हथियारों की तस्करी मयांमार से हो रही है, इस पर सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। विधि और न्याय यहां विफल रहा है, यह शर्मनाक है। यहां दो सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस और भाजपा सदस्यों के बीच नोंकझोंक होने लगी जिसके कारण सदन की कार्यवाही साढे़ पांच बजे तक स्थगित कर दी गई।
