लोकसभा में आशा कर्मियों के वेतन का मुद्दा उठा

नयी दिल्ली 30 जुलाई (वार्ता) लोकसभा में बुधवार को आशा कर्मियों की हालत पर चिंता जताते हुए उनको निश्चित मासिक वेतन देने की मांग की गयी।

शिवसेना ने के रविन्द्र दत्ताराम वायकर ने शून्यकाल के दौरान देशभर के आशा कर्मियों को मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस देश में करीब 10 लाख आशा वर्कर है जिनकी स्थित अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस साल राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत शुरू हुए आशा कार्यक्रम के बीस साल हो गये। उन्होंने कहा कि 20 साल की निःस्वार्थ सेवा के बाद भी आशा वर्कर सबसे अधिक शोषित और उपेक्षित है।

उन्होने कहा कि आशा कर्मियों का कोई निर्धारित वेतन नहीं है और कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है। इसके अलावा भविष्य के लिए कोई आर्थिक गारंटी भी नहीं है।

उन्होंने पूरे देश में आशा वर्करों को निर्धारित वेतन तय करने और देशभर एक समान लागू करने की मांग की।

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