मोदी के कार्यकाल में आतंकवादी घटनाओं में कमी आई – नड्डा

नयी दिल्ली 30 जुलाई (वार्ता) राज्य सभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने बुधवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पिछले 11 वर्षों में जम्मू कश्मीर को छोड़कर शेष देश में आतंकवादी हमले बंद हो गये हैं।

श्री नड्डा ने उच्च सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि देश मेंं 2014 के पहले कई आतंकवादी हमले हुए जिनमें सैकड़ों लोग मारे गये लेकिन 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद जम्मू कश्मीर को छोड़कर शेष देश में आतंकवादी घटनाओं पर रोक लग गयी।

उन्होंने इस सिलसिले में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को अमावस्या की संज्ञा देते हुए कहा कि उस दौरान कई आतंकवादी घटनाएं हुईं लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 की बीच का कांग्रेस का कार्यकाल अमावस्या की तरह था और उसके बाद 2014 में मोदी सरकार ने कार्यभार संभाला और सरकार के पिछले 11 वर्ष के कार्यकाल को पूर्णिमा की संज्ञा दी जा सकती है जिसमें आतंकवादी घटनाएं बंद हो गयीं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने संप्रग सरकार के शासन में आतंकवादी घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए कहा कि 2005 में जौनपुर में हरकत-उल-जेहाद के आतंकवादी हमले में 14 लोग मारे गये लेकिन उस समय की सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद 2005 में दिल्ली में सीरियल बम धमाके हुए जिसमेें सरोजनी नगर और पहाड़गंज को निशाना बनाया गया जिसमें 67 लोग मारे गये और करीब 200 लोग घायल हुए लेकिन इस घटना पर भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि एक के बाद एक हमले होते रहे। वर्ष 2006 में मुंबई में रेल बम धमाके हुए जिसमें 209 लोग मारे गये और करीब 700 लोग घायल हुए। इसमें इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था। इस हमले के बाद केन्द्र सरकार ने कार्रवाई के नाम पर ‘ज्वाइंट एंटी टेररिजम मैकेनिजम’ बना दिया। इसकी पहली बैठक दो महीने बाद हुई जबकि दूसरी बैठक सात महीने बाद हुई। इसके बाद भी हमले होते रहे और पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापार और पर्यटन जारी रहा।

श्री नड्डा ने कहा कि दिल्ली में 2008 में कनॉट प्लेस में आतंकवादी हमला हुए जिसमें भी कई लोग मारे गये। इस आतंकवादी हमले के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की थी। श्री नड्डा ने कहा कि मुंबई आतंकवादी हमले में 166 लोगों की मौत हुई जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए। मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान को डोजियर भेजे लेकिन इसके बाद कुछ नहीं किया।

उन्होंने कहा कि देश में फौज और पुलिस तो वही होती है लेकिन सरकार के काम करने का तरीका उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति से परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि 2016 में उरी में जैश-ए-मोहम्मद ने आतंकवादी हमला किया था तो प्रधानमंत्री मोदी ने कोझिकोड में कहा था कि उरी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जायेगा। इसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक से उस हमले का जवाब दिया गया जिसे सारी दुनिया ने देखा।

श्री नड्डा ने पुलवामा बस हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान ने बड़ी गलती कर दी है और उसे खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसके बाद भारतीय सेना ने बालाकोट पर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर 11 दिनों के अंदर हमला करके सरकार की इच्छाशक्ति का परिचय दिया था।

केन्द्रीय मंत्री ने पहलगाम आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि श्री मोदी ने बिहार के मधुबनी में एक जनसभा में कहा था कि पाकिस्तान ने बड़ी गलती कर दी है और उसे कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। इसी के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया और पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।

श्री नड्डा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में 22 मिनट के अंदर जिस तरह भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकवादी अड्डों को ध्वस्त किया ये भारत की राजनीतिक इचछाशक्ति को जाहिर करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने जिस सटीकता से यह हमला किया उसकी तारीफ की जानी चाहिए क्योंकि इस हमले में किसी पाकिस्तानी नागरिक को निशाना नहीं बनाया गया।

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