नयी दिल्ली 29 जुलाई (वार्ता) कांग्रेस ने पहलगाम आतंकवादी हमले को सुरक्षा में बड़ी चूक बताते हुए सरकार से इसकी जवाबदेही तय करने तथा सच्चाई का पता लगाने के लिए करगिल समीक्षा समिति की तर्ज पर एक समीक्षा समिति का गठन करने की मांग की है और साथ ही यह भी कहा है कि यदि इस चूक की जिम्मेदारी गृह मंत्री अमित शाह की है तो उन्हें अपना पद छोड़ देना चाहिए।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक आपरेशन सिंदूर’ पर मंगलवार को शुरू हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चार सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ विवादों के समाधान में भारत की विदेश नीति में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का कोई स्थान नहीं है तो पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के मामले में तीसरे पक्ष को क्यों शामिल किया गया। उन्होंने दूसरा सवाल पूछा कि जब पाकिस्तान बैकफुट पर था तो यह सैन्य कार्रवाई किन शर्तों पर रोकी गयी। क्या इस मामले में अमेरिका ने हस्तक्षेप किया। क्या यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका के कहने पर रोकी गयी। क्या भारत ने इसे अमेरिका की ‘व्यापार धमकी’ के कारण माना।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के खिलाफ की गयी सैन्य कार्रवाई के बारे में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गयी टिप्पणियों के बारे में भी प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। नेता विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई रूकवाने के बार बार किये जा रहे दावों पर भी अपनी चुप्पी तोड़ने को कहा। उन्होंने कहा, “ अचानक युद्ध विराम की घोषणा कहां से हुई, किसने की, हमारे प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री या रक्षा मंत्री ने नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने की। सरकार मानने के लिए तैयार नहीं है लेकिन ट्रंप 29 बार यह बात कह चुके हैं। उन्होंने व्यापार धमकी का इस्तेमाल कर युद्ध रूकवाया। ये ट्रेड की बात किसके फायदे के लिए है। ”
उन्होंने कहा कि श्री मोदी श्री ट्रंप की बात पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं। नेता विपक्ष ने कहा कि श्री ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पांच जेट गिराये गये। श्री खरगे ने कहा कि देश इस बारे में सच्चाई जानना चाहता है।
श्री खरगे ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने सात अप्रैल को जम्मू कश्मीर में दावा किया था कि कश्मीर में आतंकवाद के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा था तो 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमला कैसे हो गया। उन्होंने इस हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री के कश्मीर के निर्धारित कार्यक्रम को टालने को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार को किसी हमले की पहले से आशंका थी।
नेता विपक्ष ने 2016 के उरी और पठानकोट आतंकवादी हमले , 2019 के पुलवामा आतंकवादी हमले, 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इनके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने सवाल किया कि गृह मंत्री यह बताए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं। पहलगाम हमले से पहले हुए हमलों से कोई सबक क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने पूछा कि गृह मंत्री बताएं इनके लिए कौन जिम्मेदार हैं और अगर वह स्वयं हैं तो अपनी कुर्सी खाली करें। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है तो प्रधानमंत्री तय करें।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल ने माना है कि पहलगाम आतंकवादी हमला बड़ी सुरक्षा विफलता है और उन्होंने इसी जिम्मेदारी भी ली है लेकिन इसकी जिम्मेदारी तो गृह मंत्री को लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्या उप राज्यपाल गृह मंत्री को बचाने के लिए जिम्मेदारी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसकी सच्चाई का पता लगाया जाना चाहिए और जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले की सच्चाई का पता लगाने के लिए सरकार को करगिल युद्ध के बाद सरकार द्वारा गठित करगिल समीक्षा समिति की तर्ज पर एक समीक्षा समिति का गठन करना चाहिए।
श्री खरगे ने सरकार पर ऑपरेशन सिंदूर पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाया और कहा कि संकट के समय कोई भी देश भारत के साथ खुलकर खड़ा नहीं दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि
इस विदेश नीति से भारत के सामरिक हित सुरक्षित नहीं हो पाए और यहां तक अमेरिका ने भी हमले की खुलकर निंदा नहीं की। उन्होंने कहा बुरे वक्त में आपके साथ कोई नहीं आया बल्कि अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपना पक्का साथी बताया।
नेता विपक्ष ने कहा कि सैन्य कार्रवाई रूकने के बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक द्वारा पाकिस्तान को पैकेज दिये जाने का भारत ने विरोध क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा , “ आपके एक दोस्त ने भी साथ नहीं दिया बल्कि आपके विरोधी की मदद की। ”
श्री खरगे ने कहा कि हमले के पहले दिन से ही समूचा विपक्ष सरकार के साथ खड़ा था लेकिन सरकार ने न तो उसे जानकारी देकर विश्वास में रखा और न ही संसद का विशेष सत्र बुलाने की उसकी मांग मानी। विपक्ष के इस संबंध में पत्र का सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में श्री मोदी नहीं आये और न ही अब वह सदन में बैठकर यह बहस सुन रहे। उन्होंने कहा , “ अगर सुनने की क्षमता नहीं है तो आप उस कुर्सी पर बैठने के लायक नहीं हो। ” उन्होंने आरोप लगाया कि श्री मोदी के लिए सर्वदलीय बैठक से पार्टी का प्रचार ज्यादा महत्वपूर्ण है।
