
नई दिल्ली, 01 दिसंबर, 2025: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच जारी खींचतान अब कांग्रेस हाईकमान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। दोनों नेताओं के बीच समझौते की कोशिशों के बावजूद, अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता है। इस विवाद ने जातीय राजनीति को भी हवा दी है, क्योंकि शिवकुमार खेमे ने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व परिवर्तन की बात उठाई है।
दलित नेताओं की मांग पर खरगे का नाम चर्चा में
कर्नाटक की 2023 की जीत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का हवाला देते हुए अब दलित विधायकों का दबदबा बढ़ता जा रहा है, और वे उचित प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में, पार्टी के भीतर चर्चा तेज हो गई है कि यदि नेतृत्व में बदलाव करना पड़े, तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जैसा कद्दावर और सर्वमान्य चेहरा सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है। खरगे का नाम इसलिए प्रमुख है, क्योंकि उनका दलित समुदाय में गहरा प्रभाव है।
हाईकमान की नज़र अगले कदम पर टिकी
सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच बढ़ते विवाद के बाद, कांग्रेस हाईकमान ने दखल दिया और दोनों को सार्वजनिक रूप से हाईकमान के फैसले का सम्मान करने को कहा। वहीं, जी. परमेश्वर और सतीश जारकीहोली जैसे अन्य दलित नेता भी सीएम पद की दौड़ में उभर रहे हैं। अब सभी की निगाहें कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या खरगे की अधूरी इच्छा पूरी होगी और क्या कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिलेगा।
