ग्वालियर: सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। वक्ताओं ने चेताया कि जब समाज अपनी जड़ों को भूलता है, तब वह कमजोर होता है। इतिहास गवाह है आपसी फूट और स्वार्थ के कारण भारत को नुकसान उठाना पड़ा। इसलिए सभी को स्वार्थ छोडक़र संगठित होना चाहिए, तभी भारत बलशाली और पुन: विश्व गुरू बन सकेगा।
हरिशंकर पुरम में आयोजित हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य क्षेत्र के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य विश्वजीत ने कहा कि भारत मृत्यंजय राष्ट्र है, जिसकी आत्मा को कोई राष्ट्र समाप्त नहीं कर सकता। हम भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप की परंपरा के वंशज हैं। विगत दो हजार वर्षों तक देश ने आक्रमणकारियों का सामना किया, लेकिन आपसी फूट और स्वार्थ के कारण भारत को पराभव देखना पड़ा।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का जिक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जहां हिंदू कम होते हैं, वहां कटते हैं। इसलिए हिंदुओं को संगठित होना होगा। विश्वजीत ने पंच परिवर्तन-सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व बोध, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक शिष्टाचार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई छोटा-बड़ा नहीं है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभय कात्यायन ने कहा कि बच्चों को धनोर्पाजन की मशीन नहीं बनाएं, उन्हें संस्कार भी दें।
विशिष्ट अतिथि ज्योति गुप्ता ने भी पंच परिवर्तन पर अपने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता प्रकाश चांदवानी ने की। आर्य समाज बस्ती का हिंदू सम्मेलन सिंहपुर रोड स्थित आरडी कॉन्वेंट स्कूल मुरार में आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता मध्य भारत प्रांत कुटुंब प्रबोधन प्रमुख अशोक पाठक ने हिंदुओं की संख्या बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि जो अभिभावक अपने बच्चों का लालन-पालन करने में असमर्थ हैं, वह मातृशक्ति के चल रहे संगठन को अपने बच्चों को दे सकते हैं।
