नयी दिल्ली, 28 जुलाई (वार्ता) दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती से सोमवार को रुपया 13.75 पैसे कमजोर हुआ और 86.7025 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।
भारतीय मुद्रा लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कमजोर हुई है। इसके पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों कारण हैं। एक तरफ दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर में तेजी जारी है और दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय पूँजी बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
दबाव के बीच रुपया शुरुआत में 9.50 रुपये की मजबूती के साथ खुला और 86.4050 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूत हुआ। हालाँकि बाद में मुद्रा बाजार में डॉलर की माँग आने से रुपया लगातार गिरावट में रहा। कारोबार की समाप्ति पर यह 86.7025 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो सोमवार को इसका न्यूनतम स्तर भी था।
रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक श्रीराम अय्यर ने बताया कि आयातकों ओर कंपनियों की तरफ से महीने के अंत में डॉलर की माँग आने से भारतीय मुद्रा दबाव में रही। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका-यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार समझौते की घोषणा के बाद डॉलर मजबूत हुआ है जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आज दो प्रतिशत बढ़े जिससे भी रुपये में गिरावट आ गयी।
