नयी दिल्ली, 28 जुलाई (वार्ता) प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के देश में 10 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हैं। इनमें से 1.3 प्रतिशत यानी 13 लाख से अधिक ने कनेक्शन लेने के बाद एक भी रीफिल नहीं करायी है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि उज्ज्वला योजना के निष्क्रिय कनेक्शनों की पहचान इन आँकड़ों के आधार पर की जा सकती है कि कितने उपभोक्ताओं ने एक बार भी रीफिल नहीं करायी है।
उन्होंने बताया कि 01 जुलाई 2025 तक उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं की संख्या 10 करोड़ 33 लाख है। इनमें निष्क्रिय उपभोक्ता 1.3 प्रतिशत थे जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद से एक भी बुकिंग नहीं करायी है।
श्री गोपी ने बताया कि सरकार ने उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को पारंपरिक ईंधनों की जगह एलपीजी का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई प्रयासों की शुरुआत की है। इसके लिए समय-समय पर स्थानीय स्तर पर तेल विपणन कंपनियों द्वारा एलपीजी पंचायत का भी आयोजन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मई 2022 से हर साल 12 सिलेंडर 200 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी शुरू की गयी थी। इसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया। इससे उज्ज्वला योजना में प्रति उपभोक्ता सिलेंडर की खपत वित्त वर्ष 2022 के 3.68 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 4.47 पर आ गई।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 में उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं ने औसतन 3.01 सिलेंडर बुक कराये थे। कोविड-19 के दौर में 2020-21 में अचानक यह संख्या बढ़कर 4.39 पर पहुँच गयी थी। हालाँकि अगले साल 2021-22 में इसमें फिर गिरावट आयी और यह 3.68 सिलेंडर प्रति उपभोक्ता रही। उज्ज्वला उपभोक्ताओं ने वित्त वर्ष 2022-23 में औसतन 3.71 सिलेंडर, 2023-24 में 3.95 सिलेंडर और 2024-25 में 4.47 सिलेंडर की बुकिंग करायी।

