
धार। जिले की बदनावर तहसील के कानवन मांगोद टू लाइन मार्ग स्थित खिलेड़ी गांव में मार्ग पर शवयात्रा डीजे के साथ निकल रही है तो महिलाएं लोट लगाते हुए रूडक रही है। टू लाइन मार्ग से गुजरने वाले राहगीर शवयात्रा को देख कर रुक रहे है उन्हें नमन कर रहे है उनके भाव श्रद्धा सुमन अर्पित जैसे प्रतीत हो रहे है लेकिन राहगीरों के भावुक मुख व उनके नमन करने की क्रिया को देख शवयात्रा उठाने वाले युवा उन पर हंस रहे है। इधर अर्थी उठाने वालों की हंसी देख राहगीर अचरज में पड़कर अचंभित है।
आपने जो पढ़ा यह किसी नाट्यमंच की न तो प्रस्तुति है और न ही किसी फ़िल्म की शूटिंग हो रही है। जी हाँ यह सारा हास्यास्पद दृश्य इंद्रदेव की बेरुखी से मुरझाती फसलों को बचाने के लिए जीवित व्यक्ति की शवयात्रा का टोना टोटका है। यह सारा माजरा धार जिले की बदनावर तहसील के गांव खिलेड़ी का है। बीते एक पखवाड़े से बारिश नहीं होने के कारण अंचल के खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल मुरझाने की कगार पर पहुंच गई है। अल्प वर्षा के कारण मुरझाती फसलों को देख किसान बेहद चिंतित है एवं फसलों से ज्यादा किसानों के चेहरे मुरझाए हुए दिखाई दे रहे हैं। रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिए शुक्रवार को खिलेड़ी के ग्रामीणों ने बाग रसोई का आयोजन किया व स्थानीय हनुमान जी मंदिर में पंडित सुभाष चंद्र चौबे के सान्निध्य में हवन भी किया। ग्रामीणों ने कृषि कार्य बंद रख खेत खलिहानो में भोजन बनाकर इंद्रदेव को भोग लगाकर पूजन अर्चन कर अच्छी बारिश की कामना की।
मंदिर आया, मुर्दा उठा, नमन किया लड्डू खाया और सो गया
मानसून की बेरुखी ने ग्रामीणों को अच्छी बारिश के टोने टोटके शुरू करने के लिए मजबूर कर दिया। शुक्रवार को हनुमान जी मंदिर से अर्थी पर जीवित व्यक्ति को सुलाया, कफन ओढ़ाया और डीजे के साथ शवयात्रा लेकर नगर भ्रमण पर निकल पड़े। अर्थी के आगे चल रहे गधे पर उलटे मुँह कर युवक को बिठाया।महिलाएं शवयात्रा के पीछे मंगल गीत गाती हुई चल रही थी। डीजे की धुन पर बज रहे बरस बरस मेरे इन्दर राजा के गीत पर युवा अर्थी को उछालते व नृत्य करते हुए चल रहे थे। बिच बिच में मुर्दे के रूप में सोया व्यक्ति भी हंस रहा था। नगर भ्रमण के दौरान आने वाले मंदिरो के सामने शवयात्रा को रोका मुर्दे ने उठकर भगवान को प्रणाम कर अच्छी बारिश की कामना की। टोटके के लिए सुलाए जीवित व्यक्ति को ग्रामीण लड्डू खिलाकर इंद्रदेव को खुश करने के जतन करते रहे।इधर गांव के कांकड़ पर इंद्रदेव की सामूहिक पूजा अर्चना कर अच्छी बारिश के साथ आगमन की याचना की। महिलाओं ने लोट लगाकर इंद्रदेव को प्रसन्न करने के प्रयास किए। सम्पूर्ण नगर में भ्रमण करते हुए शवयात्रा मुक्तिधाम पहुंची। यंहा अंतिम संस्कार की क्रिया के रूप में प्रतिकात्मक पुतले व शवयात्रा में उपयोग की गई सामग्री का दाह संस्कार कर दिया।
ताने सुनने वाला गधा भी पूजा गया
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित रूढ़िवादी टोटको के माध्यम से रूठें इंद्रदेव को मनाने का जतन प्रचलित है। आमतौर पर ताने मारने के साथ हर किसी को गधा बोलते रहते है। समय आने पर गधे को बाप बनाने की कहावत चरितार्थ होती दिखी। जिन्दा व्यक्ति की शवयात्रा के आगे चलने वाले गधे को भी हास्यास्पद रूप में प्रणाम करते हुए नमन किया।
