
रीवा।वेटरनरी कॉलेज रीवा में गिद्ध संरक्षण को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉलेज के डीन डॉ. अजीत प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं में प्रकृति के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में सहायक होते हैं। साथ ही, उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में संजय टाइगर रिजर्व से बायोलॉजिस्ट डॉ. संगीता केवट उपस्थित रहीं। उन्होंने गिद्धों की घटती संख्या के प्रमुख कारणों में से एक NSAID (नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स) दवाओं के दुष्प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वेटरनरी छात्रों और डॉक्टरों को गिद्धों की विभिन्न प्रजातियों, उनके रहवास, पारिस्थितिकीय महत्व और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया।
कार्यक्रम का आयोजन वेटरनरी कॉलेज रीवा के सहयोग से वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन प्रोफेसर डॉ. अनिल सिंह ने किया जबकि संचालन प्रोफेसर सुलोचना द्वारा किया गया।
समग्र जन चेतना विकास परिषद के समन्वयक सुमित सिंह ने गिद्ध संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी, जागरूकता अभियान और युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और स्थानीय संगठनों द्वारा मिलकर कई संरक्षण प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें जन-सहभागिता को प्रमुखता दी जा रही है।
कार्यक्रम में कॉलेज के अंतिम वर्ष के छात्र, संस्था के सहयोगी चक्रपाणि मिश्रा, आरती पटेल, डॉ. संगीता सहित समस्त स्टाफ की उपस्थिति रही। वक्ताओं ने गिद्धों के पर्यावरणीय महत्व, उनकी संख्या में हो रही गिरावट और जैविक संतुलन पर इसके प्रभाव पर गंभीर चर्चा की।
कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों में पर्यावरणीय चेतना जागृत करना, गिद्ध संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और भविष्य के लिए एक संवेदनशील पीढ़ी तैयार करना रहा।
