नयी दिल्ली, 25 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में परिसीमन कर विधानसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने की मांग वाली एक याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने के पुरुषोत्तम रेड्डी की उस गुहार को ठुकरा दी, जिसमें दलील दी गई थी कि जम्मू-कश्मीर के लिए परिसीमन किया गया और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ाई गयी, लेकिन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ऐसा नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता ने इसे मनमाना और संविधान का उल्लंघन करार दिया था।
पीठ ने रेड्डी की परिसीमन के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों को जम्मू-कश्मीर के समान नहीं माना जा सकता।
पीठ ने यह मानते हुए कि इससे (याचिका स्वीकार करने से) सभी राज्यों के लिए समानता की मांग करने के लिए ढेरों रास्ते खुल जाएँगे। पीठ कहा, “हमारा मानना है कि धारा 170(3) के तहत संवैधानिक जनादेश एक बाधा के रूप में कार्य करता है। परिसीमन की मांग इसके विपरीत है। पुनर्गठित होने के कारण जम्मू-कश्मीर संविधान के भाग सात के अध्याय 3 द्वारा शासित नहीं है इसलिए हमें इस बात में कोई दम नहीं लगता कि विवादित परिसीमन अधिसूचना से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को बाहर रखना मनमाना या संविधान का उल्लंघन है।”
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 2022 में परिसीमन किया गया और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ायी गयी थी।
