उज्जैन:सम्राट विक्रमादित्य के कार्यकाल में जब महामारी आई थी उस दौरान माता को प्रसन्न करने के लिए नगर पूजा प्रारंभ की गई थी, जिसका आज तक निर्वहन किया जाता है. चैत्र की नवरात्रि की अष्टमी पर महालया महामाया माता को मदिरा का भोग लगाकर 27 किलोमीटर तक अविरलधार चढ़ाई गई.
दरअसल, उज्जैन में कोरोना काल के दौरान जब नगर की जनता बहुत परेशान हो गई थी तो अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में माता को प्रसन्न करने के लिए एक बार फिर प्रार्थना की गई और चांदी के पात्र में माता को मदिरा का भोग लगाकर प्राचीन परंपरा का निर्वहन शुरू किया गया.
अध्यक्ष और एसपी ने की पूजा
24 खंबा माता मंदिर पर नगर पूजा की शुरुआत हुई. निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष रविंद्रपुरी महाराज, संत समुदाय, नगर के समाजसेवियों से लेकर धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारी द्वारा यह पूजा की जाती है. इसमें एसपी प्रदीप शर्मा ने भी नगर पूजा की.
सुख समृद्धि की कामना
नवभारत से चर्चा में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि देश प्रदेश नगर में सुख समृद्धि की कामना के तहत यह पूजा शुरू की गई है, सम्राट विक्रमादित्य के काल से ही यह पूजा चलती आ रही है, मदिरा का भोग लगाया जाता है और नगर पूजा की जो परंपरा है उसका हमने निर्वहन किया है।
