
सरकारी आंकड़ों ने खोली पोल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर गंभीर असर, सामाजिक बहिष्कार का खतरा
कराची, 22 जुलाई 2025
पाकिस्तान इस समय एक गंभीर सामाजिक त्रासदी से जूझ रहा है, जहाँ चौंकाने वाले सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग साढ़े चार करोड़ लोगों के पास वैध पहचान पत्र (ID Card) नहीं हैं। यह एक ऐसा संकट है जो इन करोड़ों नागरिकों को बुनियादी अधिकारों और अवसरों से वंचित कर रहा है, जिससे उन्हें स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पा रहा, नौकरी नहीं मिल रही, और वे सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति पाकिस्तान में शिक्षा, रोजगार और नागरिक अधिकारों की पहुंच पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
‘नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी’ (NADRA) के हालिया आंकड़ों ने इस भयावह सच्चाई को उजागर किया है। पहचान पत्र की कमी के कारण ये लोग न केवल औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हैं, बल्कि उन्हें संगठित क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी नहीं मिल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे अक्सर गरीबी और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने को मजबूर होते हैं, जहाँ उन्हें न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा का कोई लाभ नहीं मिलता। यह संकट देश के विकास और स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि एक बड़ी आबादी को मुख्यधारा से बाहर रखना सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ावा देता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, और पाकिस्तान सरकार पर पहचान पत्र उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कदम उठाने का दबाव बना रहे हैं।
