
संसद के दोनों सदनों के सदस्य करेंगे मतदान, लोकतंत्र की निरंतरता सुनिश्चित करने की कवायद
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025 : भारत के संविधान में उपराष्ट्रपति के महत्वपूर्ण पद की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत अगले उपराष्ट्रपति की नियुक्ति के लिए चुनाव जल्द से जल्द कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह संवैधानिक व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि देश का दूसरा सर्वोच्च पद किसी भी स्थिति में लंबे समय तक रिक्त न रहे, जिससे लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलती रहे। उपराष्ट्रपति का पद न केवल संवैधानिक गरिमा रखता है, बल्कि वे राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में विधायिका में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
उपराष्ट्रपति का चुनाव एक विशेष निर्वाचक मंडल द्वारा संपन्न कराया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत) शामिल होते हैं। यह चुनाव ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली’ के अनुसार ‘एकल संक्रमणीय मत’ द्वारा गुप्त मतदान के माध्यम से होता है। संविधान का यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, बीमारी, या पद रिक्त होने की स्थिति में उपराष्ट्रपति तुरंत उनके कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। वर्तमान उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, ताकि पद ग्रहण में कोई विलंब न हो। यह पूरी प्रक्रिया भारत के मजबूत लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
