ग्वालियर: एक हजार बिस्तर अस्पताल परिसर में मरीज के परिजनों के ठहरने के लिए बनाई गई धर्मशाला का ताला तमाम प्रयासों के बाद भी खुल नहीं पाया। जबकि इस धर्मशाला को प्रारंभ करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री के साथ कलेक्टर निर्देश दे चुकी हैं। इसके न खुलने से दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीज के परिजनों को ठहरने के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। धर्मशाला का ताला खुल जाए तो यह परेशानी तुरंत दूर हो जाए।
राशि मिली तो मिल गई अब खरीदी में उलझे
धर्मशाला में फर्नीचर व अन्य सामान खरीदने के लिए प्रदेश सरकार में मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने अपनी निधि से राशि देने की बात कही थी, और यह राशि जीआरएमसी प्रबंधन को मिल गई। राशि मिलने के बाद अब गुजारा करना पड़ रहा है। गुजारा तो क्या इतना भी फंड नहीं उस पर खरीदी प्रक्रिया का झंझट खड़ा हो गया है। धर्मशाला का ताला न खुलने से मरीजों को टूटे-फूटे टीन शेड में बैठकर ही गुजरा करना पड़ रहा है
बारिश में मरीजों के परिजन हो रहे परेशान, एक हजार बिस्तर अस्पताल परिसर का मामला
हजार बिस्तर अस्पताल में धर्मशाला प्रारंभ न होने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। चर्चा इस बात की हो रही है कि अस्पताल में प्रतिदिन तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा 1000 मरीज भर्ती रहते हैं। इनसे ओपीडी शुल्क सहित अन्य सुविधाओं का चार्ज लिया जाता है। क्या जीआरएमसी प्रबंधन के पास महज कुछ लाख रुपए का फंड नहीं है, कि वह धर्मशाला के लिए फर्नीचर, पलंग व गद्दे खरीद सकें।
डीएम ने कहा था 15 दिन में शुरु हो जाए
कलेक्टर रुचिका चिका चौहान के पास धर्मशाला प्रारंभ न होने की बात पहुंची थी। 3 दिसम्बर 2024 को उन्होंने जीआरएमसी प्रबंधन को निर्देश दिए थे कि अगले 15 दिन के अंदर धर्मशाला का ताला खुल जाना चाहिए और मरीज के अटेंडरों को वहां रुकवाने के लिए इंतजाम होने चाहिए। 7 माह बीतने को हैं इसके बाद भी इस आदेश के पालन को लेकर कुछ नहीं किया गया। धर्मशाला में अभी ताला लटका हुआ है।
सिर्फ दाल-चावल से काम नहीं चलेगा
शहर की कई सामाजिक संस्थाएं जयारोग्य अस्पताल परिसर में संचालित तमाम विभागों में सुबह से लेकर शाम तक मरीज के अटेंडरों को निः शुल्क भोजन व्यवस्था उपलब्ध कराती हैं। परिसर में संस्थाओं के सदस्य आवाज लगाते हुए आराम से देखे व सुने जाते हैं। अब जरूरत यह भी है कि संस्थाएं आगे आएं और धर्मशाला खुलवाने की पहल करें। जिससे दूर-दराज से आने वाले परेशान लोगों को आसरा मिल सकें।
