रीवा:झमाझम बारिश के बीच आवारा गौवंश सुरक्षित स्थान के तलाश में सडक़ो पर धमाचौकड़ी मचाते देखे जा रहे है. नेशनल हाइवे से लेकर तमाम मार्गो में गौवंश बैठे नजर आते है. कलेक्टर के आदेश का पालन नही हो रहा है न ही निराश्रित गौवंशो को हटाने का अभियान चल रहा है और न ही पशु पालको के खिलाफ जुर्माना और एफआईआर की कार्यवाही हो रही है.
कलेक्टर का आदेश केवल कागजो तक ही सीमित रह गया है. मजे की बात तो यह है कि शहर के अंदर सैकड़ो गौवंश घूमते नजर आ रहे है. वर्षाकाल शुरू होते ही निराश्रित गौवंश एवं अन्य पशु सूखे स्थान की तलाश में सडक़ों में आश्रय लेते हैं, सडक़ों में गौवंश बड़ी दुर्घटना का कारण बनते हैं इसमें वाहन सवारों को नुकसान पहुंचने के साथ गौवंश को भी क्षति होती है.
सडक़ों से गौवंश को हटाकर वाहन दुर्घटनाओं को रोकने और गौवंश को सुरक्षित करने के उद्देश्य को पूरा करने कलेक्टर ने निर्देश जारी किये है. लेकिन निर्देशो का पालन मैदानी स्तर पर नही हो रहा है. कलेक्टर के निर्देश के मुताबिक सडक़ो से निराश्रित गौवंश को हटाने का अभियान चलाया है. लेकिन निर्देश केवल बैठक और कागज तक ही सीमित है. नेशनल हाइवे सहित सभी मार्गो में गौवंश धमाचौकड़ी मचा रहे है और हादसे का शिकार हो रहे है. सडक़ो पर गौवंश को छोडऩे वालो के खिलाफ जुर्माने के साथ एफआईआर दर्ज की जानी है पर कही भी कोई कार्यवाही नही हो रही.
निर्देश के मुताबिक नेशनल हाईवे लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना तथा मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम मिलकर पशुओं को सडक़ों से हटाने का अभियान चलाएं. इस कार्य में पशुपालन विभाग,नगर निगम, नगर पंचायत तथा ग्राम पंचायतें सहयोग करेंगी, निराश्रित गौवंश को सडक़ों से हटाकर आसपास की गौशाला में सुरक्षित कराएं, जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गौशालाओं में गौवंश को रखने के लिए समुचित व्यवस्था करें, यदि गौशालाओं में स्थान रिक्त नहीं है तो गौशाला के आसपास खाली भूमि पर अस्थाई बाड़ा बनाकर गौवंश को रखें, इनके भूसा, चारा, पानी और उपचार की पूरी व्यवस्था करें. मैदानी स्तर पर निर्देश का पालन दिखाई नही दे रहा है. चारो तरफ उल्लंघन हो रहा है.
शहर में भी आदेश पर अमल नही
कलेक्टर द्वारा दिये गये आदेश एवं कमिश्नर के निर्देश का पालन ग्रामीण क्षेत्र तो छोडिए शहर में भी नही हो रहा है. नगर निगम क्षेत्र अन्तर्गत निराश्रित गौवंश घूम रहे है. बाजार एवं आवाजाही वाले क्षेत्रो में धमाचौकड़ी मचाते गौवंश दिख जाते है. एक नही बल्कि झुंड में शहर की सडक़ो पर बैठै रहते है पर आला अफसरो के आदेश का पालन जब उनके नाक के नीचे नही हो रहा तो कैसे माना जाय कि ग्रामीण क्षेत्रो में होता होगा. कलेक्टर-कमिश्नर के सख्त निर्देश के बावजूद शहर में आवारा गौवंश को पकड़ कर गौशाला में लेकर जाने एवं पशु पालको के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नही हो रही है. एफआईआर तो बहुत दूर है जुर्माना तक नही किया जा रहा है. लिहाजा शहर के अंदर आवारा गौवंश हादसे का शिकार हो रहे है और दूसरो को भी शिकार बना रहे है.
