नयी दिल्ली, 14 जुलाई (वार्ता) नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने सोमवार को कहा कि भारत न सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि उसे नया स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
नीति आयोग द्वारा जारी तीसरे ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ की प्रस्तावना में डॉ. विरमानी ने लिखा है, “ वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूदा बदलावों और व्यापार के अलाइनमेंट में तेजी से आ रहे बदलावों के बीच भारत स्थिरतापूर्वक खुद को न सिर्फ एक भागीदार के रूप में मजबूत कर रहा है, बल्कि नये वैश्विक व्यापार ढांचे का स्वरूप तय करने वाली ताकत बन रहा है। ” उन्होंने कहा कि जहां वैश्विक व्यापार में आंशिक रूप से आर्थिक विलगाव देखा जा रहा है, भारत इससे लाभ पाने की संभावना वाले देश के रूप में उभर रहा है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2024) में देश के व्यापार की समीक्षा की गयी है। इसमें बताया गया है कि तिमाही के दौरान वस्तु निर्यात तीन प्रतिशत बढ़कर 108.7 अरब डॉलर पर और आयात 6.5 फीसदी बढ़कर 187.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया। सेवा क्षेत्र का निर्यात 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 52.3 अरब डॉलर हो गया जिससे व्यापार घाटा कम करने में मदद मिली। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर सेवा-अर्थव्यवस्था में भारत की स्थित मजबूत हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2024 में डिजिटल माध्यमों से दी गयी सेवाओं में 269 अरब डॉलर के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ी निर्यातक रहा। साल 2014 से हाई-टेक वस्तुओं का निर्यात भी बढ़ा है।
रिपोर्ट जारी करते हुए डॉ. विरमानी ने कहा कि भारत का बढ़ता व्यापार अर्थव्यवस्था की बढ़ती मजबूती की ओर इशारा करता है जो प्रतिस्पर्धात्मकता, नवाचार और अमेरिका सहित महत्वपूर्ण बाजारों में उपस्थिति बढ़ाने के रणनीतिक प्रयासों में बढ़ोतरी की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट में अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार, और कर ढांचे तथा भारत पर इसके प्रभाव पर विशेष रूप से फोकस किया गया है। इसमें कहा गया है कि अन्य बड़े प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत पर अमेरिका द्वारा कम कर लगाये जाने के कारण दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में विस्तार के लिए भारत के पास अवसर है।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने प्रस्तावना में लिखा है कि जिन सेक्टरों में कर लाभ का अंतर मामूली है, वहां भी भारत पिछड़ता हुआ नहीं नजर आ रहा है। बदलते व्यापार वातावरण में भारत के पास अपने मौजूदा लाभों का फायदा उठाकर निर्यात के नये क्षेत्रों में प्रवेश का मौका है। उन्होंने कहा कि एक ऐसे समय में जब भूराजनीतिक बदलावों, प्रौद्योगिकी में बदलाव, नीतिगत अनिश्चितता के कारण वैश्विक व्यापार का स्वरूप बदल रहा है, रिपोर्ट का यह संस्करण नीति निर्माताओं, उद्योग और शिक्षा क्षेत्र में काम करने वालों से महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगा।

