झोपड़ी की मिट्टी से निकले 80 से ज्यादा कोबरा के बच्चे,देख कर रह जायेगे दंग

पिपलियामण्डी। गांव साबाखेड़ा में एक झोपड़ी की ढीली मिट्टी से 80 से ज्यादा कोबरा सांप के बच्चे निकलने से हड़कंप मच गया। यह झोपड़ी गोपाल पिता चम्पालाल दाहिमा के कुएं के पास बनी है, जहां पशु बांधे जाते हैं। शाम करीब 5 बजे गोपाल को मिट्टी में हलचल दिखी। ध्यान से देखने पर कोबरा के बच्चे नजर आए। उन्होंने तुरंत सर्पमित्र दुर्गेश पिता घीसालाल पाटीदार को सूचना दी। दुर्गेश पाटीदार मौके पर पहुंचे। तीन घंटे की मेहनत के बाद सभी कोबरा बच्चों को सुरक्षित पकड़ा। बाद में इन्हें शिवना नदी के पास जंगल में छोड़ दिया गया। एक वयस्क नागिन को भी झोपड़ी के पास देखा गया था। अंधेरा हो जाने से उसे पकड़ा नहीं जा सका। सर्पमित्र ने बताया कि नागिन को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। दुर्गेश पाटीदार ने बताया कि वे पिछले 15 साल से जहरीले जीवों को पकड़ने का काम कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में कोबरा बच्चों को पहली बार एक साथ पकड़ा है। यह अनुभव उनके लिए जोखिम भरा और दुर्लभ रहा।

गांव में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और बारिश के मौसम में सांप बाहर निकलते हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सतर्कता जरूरी है।

सर्पमित्र दुर्गेश पाटीदार का कहना है कि व्यस्क कोबरा मादा एक बार में करीब 108 अंडे देती है, जिसमें से 30 से 35 अंडे नष्ट हो जाते है। बरसात से दो माह पूर्व यह अंडे देती है, बरसात की शुरुआत के कुछ दिनों बाद अंडों से बच्चे बाहर आने लगते है। लेकिन इतनी संख्या में कोबरा के बच्चे एक साथ मिलना पहली बार देखने को मिला।

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