
सारनी।सतपुड़ा डेम में इन दिनों जलभराव क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में कमल के पौधों के साथ-साथ खराब और वेस्टेज पौधों की भरमार देखी जा रही है। यह स्थिति न केवल जलगुणवत्ता को नुकसान पहुँचा रही है बल्कि आगामी गर्मियों में जल संकट की भी चेतावनी दे रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, डेम के किनारे और जल सतह पर बेतरतीब तरीके से फैले सड़े-गले पौधे जलाशय की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं। इससे पानी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, और बारिश के मौसम में पर्याप्त जल संग्रहण न हो पाने की आशंका भी बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के वेस्टेज पौधे जलाशयों में ऑक्सीजन की मात्रा को घटाते हैं, जिससे जलचक्र प्रभावित होता है और जल संरक्षण की क्षमता घटती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले महीनों में पानी की भारी किल्लत आम जनता को झेलनी पड़ सकती है।
इस गंभीर स्थिति के बावजूद मध्यप्रदेश विद्युत मंडल और संबंधित जल संसाधन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह लापरवाही आने वाले समय में एक बड़े जल संकट का कारण बन सकती है।
स्थानीय निवासियों ने की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों ने सतपुड़ा डेम की नियमित सफाई और निगरानी की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि जलाशय की क्षमता और शुद्धता बनी रहे।
यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो भविष्य में पेयजल आपूर्ति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।
