इंदौर: भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच कर रही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को नगर निगम के राजस्व निरीक्षक राजेश परमार के खिलाफ जांच में एक और अहम सुराग हाथ लगा है. ईओडब्ल्यू ने हाल ही में परमार के नाम और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों से कुछ ऐसे दस्तावेज जब्त किए हैं जो सरकारी आवास योजना के फ्लैट से जुड़े हैं. इन दस्तावेजों की जांच के बाद अब धोखाधड़ी की धारा भी बढ़ाई जा सकती है.
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि परमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भूरी टेकरी स्थित फ्लैट पत्नी के नाम पर खरीदा था, जिसकी कीमत करीब 15 लाख रुपए है. लेकिन दस्तावेजों में पत्नी ने पति की जगह अपने पिता का नाम लिखा है, जबकि खरीदी के समय वह राजेश परमार की पत्नी थीं और राजेश सरकारी सेवा में कार्यरत थे.
सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए यह जानकारी छिपाई गई, जिसे अब धोखाधड़ी की मंशा के रूप में देखा जा रहा है. ईओडब्ल्यू की टीम ने राऊ में दबिश के दौरान यह दस्तावेज जब्त किए थे. इसके अलावा नगर निगम से भी फ्लैट के मूल दस्तावेज जब्त कर लिए हैं, अब इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है. इस पूरे मामले में उद्यान अधिकारी चेतन पाटिल का नाम भी सामने आया है.
उनके घर से भी दस्तावेज और लेनदेन से जुड़ी जानकारी ईओडब्ल्यू को मिली है. जांच एजेंसी ने अब पाटिल के बैंक खातों और उनके परिजनों के खातों की भी पड़ताल शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि काली कमाई के लेनदेन में परिजनों की भूमिका भी संदिग्ध रही है. ऐसे में जांच का दायरा परमार के पूरे परिवार तक बढ़ सकता है. ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती अनुमान में ही करोड़ों की अघोषित संपत्ति के सुराग मिल चुके हैं. जल्द ही संबंधित आरोपियों के खिलाफ अगली कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी
